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अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में नरमी के संकेत, दुर्लभ खनिजों को लेकर बनी सहमति की रूपरेखा

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव को कम करने की दिशा में एक नई पहल हुई है। लंदन में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने दुर्लभ पृथ्वी खनिजों और मैग्नेट्स के निर्यात नियंत्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर “सिद्धांततः” एक समझौते की रूपरेखा तैयार करने पर सहमति जताई है। यह बैठक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 5 जून को हुई टेलीफोन वार्ता के बाद आयोजित की गई थी।

लंदन बैठक में अमेरिका का नेतृत्व वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने किया, जबकि चीन की ओर से उप वाणिज्य मंत्री ली चेंगगांग उपस्थित थे। वार्ता के बाद लुटनिक ने कहा, “हमने जिनेवा में बनी सहमति को लागू करने की दिशा में एक ढांचा तैयार किया है। इसे अब दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के समक्ष अनुमोदन के लिए पेश किया जाएगा।”

अमेरिका की बदलती स्थिति

व्यापार युद्ध की शुरुआत में अमेरिका का रुख आक्रामक था, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदलती नजर आ रही हैं। अमेरिका पर घरेलू दबाव बढ़ रहा है क्योंकि ऊँचे टैरिफ के चलते देश में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति संकट देखने को मिल रहा है। खासकर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर में चीन से आने वाले दुर्लभ खनिजों की कमी ने उत्पादन में रुकावट पैदा कर दी है।

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पहली बार मई में जिनेवा में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका ने चीन से शुल्कों में कटौती करने की अपील की थी। अब लंदन में अमेरिका ने चीन से नेओडाइमियम-आयरन-बोरोन (NdFeB) मैग्नेट्स जैसे महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों पर लगे निर्यात प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है।

चीन की रणनीतिक बढ़त

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस तनाव में चीन ने अब तक की वार्ताओं में रणनीतिक बढ़त हासिल की है। विशेष रूप से, उसने अपनी दुर्लभ खनिजों पर पकड़ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों के मोटर्स, ब्रेकिंग सिस्टम, और पावर स्टीयरिंग जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में उपयोग होते हैं। चीन द्वारा इन पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में संकट खड़ा कर दिया है।

चीन की ओर से यह कहा गया है कि कुछ निर्यात लाइसेंस स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन अमेरिका का आरोप है कि बीजिंग अभी भी निर्यात खोलने में टालमटोल कर रहा है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि चीन अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर रहा।

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वैश्विक असर

चीन के इन कदमों का असर सिर्फ अमेरिका पर नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखा जा रहा है। जापान की वाहन निर्माता कंपनी सुजुकी मोटर्स ने कहा है कि वह चीन की सप्लाई में रुकावटों के चलते अपनी मशहूर स्विफ्ट मॉडल की उत्पादन योजना को अस्थायी रूप से स्थगित कर रही है। भारत में भी प्रमुख वाहन निर्माता मारुति सुजुकी ने कहा है कि वर्तमान में कोई सीधा असर नहीं है, लेकिन सरकार के साथ इस मुद्दे पर विचार-विमर्श जारी है।

आगे की राह

मई में हुई जिनेवा बैठक में दोनों देशों ने व्यापार युद्ध में अस्थायी विराम देने पर सहमति जताई थी, जिसमें टैरिफ को क्रमशः घटाकर 30 प्रतिशत (अमेरिका) और 10 प्रतिशत (चीन) किया गया था। लेकिन उसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर समझौतों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

अब, लंदन बैठक के बाद बनी सहमति की रूपरेखा पर अंतिम निर्णय दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा लिया जाएगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह वैश्विक व्यापार में स्थिरता लौटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।

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