महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान दुर्घटना में निधन
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह एक विमान हादसे में निधन हो गया। यह दुर्घटना उस समय हुई जब मुंबई से बारामती जा रहा एक चार्टर्ड विमान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, सुबह करीब 8:45 बजे बारामती हवाई पट्टी के रनवे थ्रेशहोल्ड पर विमान की क्रैश-लैंडिंग हुई। इस हादसे में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो पायलट और अजित पवार के साथ यात्रा कर रहे तीन अन्य लोग शामिल थे। पवार के साथ उनके एक पीएसओ और एक सहायक भी विमान में मौजूद थे।
हादसे की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की जांच में जुट गई हैं।
अजित पवार बारामती में जिला परिषद चुनावों से जुड़ी एक सार्वजनिक रैली में हिस्सा लेने जा रहे थे। इससे पहले मंगलवार को वे मुंबई में मौजूद थे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित महाराष्ट्र कैबिनेट समिति (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की बैठक में भाग लिया था। इस बैठक में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक गैर-लगातार कार्यकाल तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने विभिन्न सरकारों में कुल छह बार इस पद की जिम्मेदारी संभाली। वे पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकारों में उपमुख्यमंत्री रहे।
उनका पारिवारिक जीवन भी सार्वजनिक रूप से जाना-पहचाना रहा। वे सुनेत्रा पवार के पति थे और उनके दो पुत्र—जय पवार और पार्थ पवार—हैं।
अजित पवार ने वर्ष 1982 में एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड में चुने जाने के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1991 में वे पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने। उसी वर्ष वे पहली बार बारामती लोकसभा सीट से सांसद चुने गए, बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी।
वे बारामती विधानसभा क्षेत्र से सात बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य चुने गए—1991 के उपचुनाव से लेकर 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 तक। नवंबर 2019 में उन्होंने एनसीपी में विभाजन कर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया और उपमुख्यमंत्री बने। फरवरी 2024 में चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न उनके नेतृत्व वाले गुट को आवंटित किया था।ANI रिपोर्ट

