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मुख्यमंत्री ने किया आईएएस तैयारी पर आधारित पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री वसन्त वीर उपाध्याय की नई पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए लेखक को बधाई दी और इसे युवाओं के लिए उपयोगी मार्गदर्शक बताया।

आईएएस की तैयारी और श्रीरामचरित मानस’ शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी के सात चरणों को महाकवि तुलसीदास रचित ‘श्रीरामचरित मानस’ के सात काण्डों—बालकाण्ड, अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, किष्किंधा काण्ड, सुन्दर काण्ड, लंका काण्ड और उत्तर काण्ड—से जोड़ा गया है। लेखक ने भारतीय प्रशासनिक सेवा सहित अन्य अखिल भारतीय सेवाओं की तैयारी को सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

यह पुस्तक रायपुर प्रेस क्लब के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह के अवसर पर विमोचित की गई, जहां मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह कृति उन युवाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी, जो यूपीएससी की परीक्षा में सम्मिलित होकर प्रशासनिक सेवाओं में जाना चाहते हैं।

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कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा और श्री मोतीलाल साहू, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा और श्री आर. कृष्णादास, प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मोहन तिवारी सहित अनेक नव-निर्वाचित पदाधिकारी, पत्रकार, साहित्यकार और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

पुस्तक के लेखक श्री वसन्त वीर उपाध्याय ने बताया कि इसमें देश-प्रदेश के लगभग 32 आईएएस अधिकारियों से संवाद के अंश भी शामिल किए गए हैं, जिससे अभ्यर्थियों को परीक्षा की तैयारी में व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल सके। पुस्तक में लक्ष्य निर्धारण, रणनीति और मूल अवधारणाओं को श्रीरामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से समझाया गया है। पहले खंड में ‘माय फर्स्ट इंटरव्यू’ श्रृंखला के आधार पर अधिकारियों के अनुभवों को स्थान दिया गया है।

लेखक के अनुसार, सातों काण्डों की व्याख्या मानव जीवन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी—दोनों संदर्भों में की गई है। बालकाण्ड आत्मसंयम और अहंकार से सीख, अयोध्या काण्ड मानसिक स्पष्टता, अरण्य काण्ड भ्रम से बचाव, किष्किंधा काण्ड मित्रता और सही संगति, सुन्दर काण्ड लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प, लंका काण्ड कर्तव्य और नीति, जबकि उत्तर काण्ड सेवा के बाद के जीवन मूल्यों की प्रेरणा देता है।
इन शिक्षाओं के माध्यम से यह पुस्तक यूपीएससी, विशेषकर आईएएस की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को प्रेरणा और दिशा प्रदान करती है।

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