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किस्टाराम क्षेत्र में चार इनामी माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, बस्तर में भरोसे और विकास की मजबूत होती जमीन

रायपुर, 30 जनवरी 2026/ सुकमा जिले के किस्टाराम क्षेत्र में 8 लाख रुपये के इनामी चार सक्रिय माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय बस्तर अंचल में बदलते हालात का महत्वपूर्ण संकेत है। यह घटनाक्रम क्षेत्र में बढ़ते विश्वास, सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था और निरंतर विकास प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटनाक्रम को “नक्सल मुक्त बस्तर – सुरक्षित छत्तीसगढ़” के संकल्प की दिशा में एक ठोस उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार की नीति और जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयास अब परिणाम देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों के समन्वित एवं सतत अभियानों, दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत कैम्प व्यवस्था, प्रभावी क्षेत्रीय उपस्थिति तथा सड़क, मोबाइल और संचार कनेक्टिविटी के विस्तार से माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में बड़ा बदलाव आया है। इन प्रयासों के कारण माओवादी संगठनों का प्रभाव क्षेत्र लगातार सिमट रहा है और उनका सामाजिक आधार कमजोर पड़ रहा है।

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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की नीति पूरी तरह मानवीय और पुनर्वास केंद्रित है। जो लोग हिंसा और उग्रवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षा, सम्मान और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास, प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बस्तर में शांति, भरोसे और विकास की यह यात्रा आने वाले समय में और मजबूत होगी तथा छत्तीसगढ़ को नक्सल हिंसा से मुक्त करने का लक्ष्य पूरी दृढ़ता से हासिल किया जाएगा।