छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरें लागू: आठ वर्ष बाद राज्यव्यापी सुधार, ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में बड़ी राहत
रायपुर, 11 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ शासन ने स्थावर संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करने और गाइडलाइन दरों में लंबे समय से चली आ रही असमानताओं को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें पूरे राज्य में लागू कर दी हैं। “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” के तहत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, रायपुर द्वारा अनुमोदित ये दरें 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गई हैं। वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार राज्य स्तर पर व्यापक संशोधन किया गया है।
पिछले आठ वर्षों में दरों में वृद्धि न होने से वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच भारी अंतर पैदा हो गया था। इस स्थिति को सुधारने के लिए पूरे प्रदेश में वैज्ञानिक पद्धति से रेशनलाइजेशन कर नई दरें निर्धारित की गई हैं। जिलों की भौगोलिक स्थिति, शहरी संरचना, ग्रामीण बसाहट, सड़क संपर्क और आर्थिक गतिविधियों में हुए परिवर्तनों को आधार मानकर कई जटिलताओं को सरल किया गया है।
पूर्व में अनेक नगरीय निकायों में एक ही वार्ड में 10 से 12 प्रकार की कंडिकाएँ लागू थीं, जिससे संपत्ति मूल्यांकन में भारी भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। कई कंडिकाएँ तो व्यवहार में अस्तित्वहीन थीं। नई गाइडलाइन दरों में अनावश्यक कंडिकाएँ हटाकर समान प्रकृति वाले क्षेत्रों को एकीकृत किया गया है। इससे एक ही क्षेत्र, सड़क या मार्ग पर संपत्तियों का मूल्यांकन अब एकरूपता के साथ किया जा सकेगा।
इस रेशनलाइजेशन का उल्लेखनीय उदाहरण कोण्डागांव जिले में देखा जा सकता है, जहाँ नगर पालिका के 22 वार्डों में पूर्व की 145 कंडिकाओं को घटाकर मात्र 30 किया गया है। नगर पंचायत फरसगांव में 49 कंडिकाओं को घटाकर 15 तथा नगर पंचायत केशकाल में 45 कंडिकाओं को घटाकर 15 कंडिकाओं में समाहित किया गया है। इससे संपत्ति मालिकों को वास्तविक बाजार मूल्य की स्पष्ट समझ मिल सकेगी।
राज्य के कई जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर बसे वार्डों और ग्रामों में बड़ी विसंगतियाँ पाई गई थीं। उदाहरणस्वरूप कोण्डागांव में एनएच-30 से लगे वार्डों में पूर्व दरें परस्पर भिन्न थीं—वार्ड 22 में 10,850 रुपये प्रति वर्गमीटर और वार्ड 4 में 10,000 रुपये प्रति वर्गमीटर। आमने-सामने स्थित वार्ड 1 और 2 में दरें क्रमशः 7,800 और 8,700 रुपये थीं। नई गाइडलाइन में इन सभी को एक समान कर 12,000 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रस्तावित किया गया है। इसी प्रकार केशकाल के एनएच-30 से लगे क्षेत्रों में भी दरें समायोजित कर 9,500 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित की गई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार किया गया है। पहले हजारों गांवों में एक ही प्रकार की भूमि या एक ही मार्ग पर स्थित होने के बावजूद दरों में बड़ा अंतर था। कई गांवों में प्रति हेक्टेयर 59,000 रुपये तक की अत्यंत कम दरें थीं, जिससे किसानों को उचित मुआवजा और बाजार मूल्य का लाभ नहीं मिल पाता था। पेरमापाल, हंगवा, तोतर, आमगांव, आदनार, चेमा, छोटेउसरी, छोटेकोडेर, टिमेनार, एहरा और गदनतरई जैसे गांवों में दरें आसपास के विकसित ग्रामों के अनुरूप समायोजित की गई हैं।
इसी प्रकार दुर्ग, रायगढ़, सरगुजा, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर, कबीरधाम, कांकेर और बस्तर जिलों में भी सड़कों, बाजारों, बसाहटों और विकास की वास्तविक स्थिति का आकलन कर गाइडलाइन दरों में व्यापक संशोधन किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और प्रमुख जिला सड़कों के दोनों ओर बसे क्षेत्रों को समान मानक पर मूल्यांकन कर दरें संशोधित की गई हैं।
नई गाइडलाइन दरों में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वर्गमीटर दर समाप्त कर दी गई है और अब सभी प्रकार की आवासीय एवं कृषि भूमि का मूल्यांकन हेक्टेयर दर के आधार पर होगा। इससे छोटे भूखंडों और कृषि भूमि के बाजार मूल्य में जो पूर्व असमानता थी, वह समाप्त होगी और किसानों को वास्तविक मूल्य व मुआवजा मिल सकेगा।
पिछले आठ वर्षों में प्रदेश के शहरों और गांवों में तेज विकास हुआ है। सड़क, संपर्क, आवासीय विस्तार, वाणिज्यिक परिसर और औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए दरों को वैज्ञानिक पद्धति से निर्धारित किया गया है, ताकि बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य का अंतर कम हो और राज्य में संपत्ति आधारित लेनदेन अधिक पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बने।
नई गाइडलाइन दरें भूमि मालिकों, किसानों, निवेशकों और आम नागरिकों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगी। इसके परिणामस्वरूप राजस्व वृद्धि, ग्रामीण-शहरी विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिरता तथा विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
ग्राम मसोरा में (विक्रेता– मनुराम चक्रधारी, निवासी गिरोला; क्रेता– शांति देवी कुशवाहा, निवासी कोंडागांव) 0.032 हेक्टेयर आवासीय भूमि का पूर्व गाइडलाइन वर्गमीटर दर से बाजार मूल्य 1,17,000 रुपये पर स्टाम्प व पंजीयन शुल्क 12,402 रुपये बनता था। नई गाइडलाइन की हेक्टेयर दर से बाजार मूल्य 54,500 रुपये पर शुल्क 5,777 रुपये हुआ, जिससे पक्षकार को 6,625 रुपये का लाभ मिला।
ग्राम केरावाही में (विक्रेता– जगारी, निवासी केरावाही; क्रेता– मनोज मानिकपुरी, निवासी केरावाही) 0.024 हेक्टेयर आवासीय भूमि का पूर्व मूल्यांकन 39,000 रुपये पर स्टाम्प-रजिस्ट्रेशन शुल्क 4,134 रुपये था। नई हेक्टेयर दर के अनुसार बाजार मूल्य 23,000 रुपये पर शुल्क 2,438 रुपये हुआ, जिससे पक्षकार को 1,696 रुपये का लाभ मिला।
