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छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली का भारत में डंका

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) सहित आम जनता की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) सहित बैंकिंग सेवाओं के मामले में भी छत्तीसगढ़ की तारीफ की गई है। केन्द्रीय बजट के एक दिन पहले संसद में पेश किए गए वर्ष 2016-17 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ और बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार हुआ है। वहीं छत्तीसगढ़ देश के उन दो राज्यों में से एक है, जहां नागरिकों को अपने आस-पास ही बैंकिंग सेवाएं मिल रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी रिकार्ड के अनुसार देश भर में 26 करोड़ 50 लाख जन-धन खाते (जनसंख्या का 21 प्रतिशत) हैं। इन खातों की प्रति व्यक्ति सघनता छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक एक करोड़ से ज्यादा खाते खुल चुके हैं। केन्द्र के आर्थिक सर्वेक्षण में श्रम ब्यूरो की एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ को देश के प्रथम तीन सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्य के रूप में भी चिन्हांकित किया गया है। गुजरात और कर्नाटक के बाद छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य है, जहां वर्ष 2015-16 की स्थिति में सबसे कम (सिर्फ तीन प्रतिशत) बेरोजगारी पाई गई है। केन्द्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में इसे ग्राफिक में भी दर्शाया गया है।
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को केन्द्र के आर्थिक सर्वेक्षण में तारीफ मिलने के साथ-साथ हाल के वर्षों में कई बार समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिली है। यह देश का पहला राज्य है जिसने विधानसभा में कानून बनवाकर अपने प्रदेश के गरीब परिवारों को भोजन का अधिकार दिलाया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा में खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा कानून 2012 पारित किया गया है। इस कानून के तहत वर्तमान में 58 लाख से ज्यादा परिवारों को हर महीने राशन कार्ड पर प्रति यूनिट सिर्फ एक रूपए में सात किलो चावल दिया जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि पीडीएस की उचित मूल्य दुकानों से प्रत्येक गरीब परिवार को सामान्य क्षेत्रों में एक किलो और आदिवासी बहुल (अनुसूचित) क्षेत्रों में दो किलो आयोडिन नमक निःशुल्क मिल रहा है। इसके अलावा प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में राशनकार्ड धारक प्रत्येक गरीब परिवार को सिर्फ पांच रूपए किलो में दो किलो चना भी दिया जा रहा है।
राज्य में वर्ष 2003 में जहां सिर्फ 8637 उचित मूल्य की राशन दुकानें थी, वहीं इनकी संख्या तेरह वर्ष में बढ़कर 12 हजार 349 तक पहुंच गई है। पारदर्शिता की दृष्टि से कम्प्यूटरीकरण छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एक और बड़ी विशेषता है। इसके अंतर्गत सभी जिलों में उचित मूल्य दुकानों को दिए जाने वाले आवंटन, राशन वितरण और राशन कार्ड धारकों की संख्या खाद्य विभाग की वेबसाइट पर नियमित रूप से प्रदर्शित की जा रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत समर्थन मूल्य नीति के आधार पर राज्य में धान खरीदी की भी सर्वोत्तम व्यवस्था की गई है।
अधिकारियों के अनुसार राज्य में वर्ष 2003-04 से वर्ष 2015-16 तक प्राथमिक कृषि साख सेवा सहकारी समितियों में किसानों से छह करोड़ 22 लाख मीटरिक टन धान खरीदा गया और इसके लिए उन्हें 64 हजार 730 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया। इधर वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष 2016-17 में 15 नवम्बर 2016 से 31 जनवरी 2017 तक लगभग ढाई महीने में इन समितियों में 69 लाख 49 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। करीब तेरह लाख 26 हजार किसानों ने इन समितियों के 1889 उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर धान बेचा है। किसानों को इसके भुगतान के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा दस हजार करोड़ रूपए से ज्यादा राशि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों को जारी की जा चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 35 लाख गरीब परिवारों को मात्र 200 रूपए के पंजीयन शुल्क पर निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन, डबल बर्नर चूल्हा और पहला सिलेण्डर मुफ्त देने का काम भी तेजी से चल रहा है। यह योजना भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल है। ये रसोई गैस कनेक्शन महिलाओं के नाम पर दिए जा रहे हैं। यह योजना लगभग साढ़े पांच महीने पहले 13 अगस्त 2016 से शुरू की गई है। योजना के तहत राज्य में अब तक सात लाख 31 हजार परिवारों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है।

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