कौन डरता है बाबा रामदेव से?

स्वराज्य करुण

अपने व्यावहारिक और सुस्पष्ट विचारों के लिए देश-विदेश में सबसे ज्यादा चर्चित और सर्वाधिक लोकप्रिय योग-ऋषि बाबा रामदेव ने अपनी जान पर खतरे का संकेत दिया है . उन्होंने लखनऊ में यह बयान दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को ताकतवर लोग रास्ते से हटा देते हैं . चूंकि मै भी भ्रष्टाचार के विरोध में आवाज़ बुलंद करता रहा हूँ , इसलिए ऐसे लोग मुझे भी दुनिया से उठाना चाहते हैं . बाबा ने यह भी कहा कि दिल्ली में हाल ही में हुए कॉमन वेल्थ खेलों में एक लाख करोड़ रूपए से भी घपला हुआ है और वे इस आर्थिक दुराचार के खिलाफ अगले माह प्राथमिकी दर्ज कराएंगे . इसमें दो राय नहीं कि बाबा रामदेव एक क्रांतिकारी योग-गुरु हैं , जिन्होंने  इंसानी सेहत की बेहतरी के लिए योग और प्राणायाम को अपने शिविरों और टेलीविजन कार्यक्रमों के ज़रिए आम जनता के घरों तक और दिलों तक पहुंचाया. वर्ना अब तक तो अधिकांश लोग यह मानते चले आ रहे थे कि योग-विद्या सिर्फ ऋषि-मुनियों के लिए है. बाबा ने जन-मानस में छाए भ्रम के इस कुहासे को दूर किया .आखिर कौन है वह ,जो उनसे डरता है , जिसे उनके क्रांतिकारी मिशन से डर लगता है ?

योग ऋषि बाबा रामदेव

उन्होंने बहु-राष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा कोल-ड्रिंक और एलोपैथिक दवाओं के  नाम पर किए जा रहे अरबों-खरबों रूपयों के ज़हर  के  काले कारोबार का पर्दाफ़ाश किया . देश की जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को बेरहमी से  लूटने वालों और देश का धन विदेशी बैंकों में जमा करने वाले चोर-डाकुओं को भी बाबा ने बेनकाब किया . इतना ही नहीं , बल्कि योग-ऋषि ने यह भी सलाह दी कि हज़ार-पांच  सौ के बड़े नोटों का चलन बंद कर दिया जाए , ताकि काले-धन के कारोबारी छोटे नोटों को आसानी से छुपा न सकें और भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके . आधुनिक प्रचार माध्यमों ने भी बाबा के इन विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी सार्थक भूमिका निभायी. ऐसे में भ्रष्टाचार करने वाले चोर-लुटेरों को तो विचलित होना ही था . बाबा  अगर अपनी जान पर किसी किस्म के खतरे का संकेत दे रहे हैं तो निश्चित रूप से  यह इस देश के करोड़ों आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है.बाबा ने  देशवासियों में स्वाभिमान जाग्रत करने के लिए भारत स्वाभिमान मंच बनाया .
बाबा रामदेव ने  योग और प्राणायाम को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्वास्थ्य से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया .बाबा ने  स्कूलों में यौन शिक्षा की वकालत करने वाले तथा कथित आधुनिक बुद्धिजीवियों को साफ़ शब्दों में नसीहत दी कि नैतिक  मूल्यों के साथ-साथ बच्चों की अच्छी सेहत के लिए यौन-शिक्षा की  नहीं ,बल्कि योग-शिक्षा की ज़रुरत है.बाबा ने लोगों को शराब ,सिगरेट ,गांजा और भांग समेत अन्य नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से आगाह किया और इनसे बचने की सलाह दी. उनके विचारों का और संदेशों का लाखों-करोड़ों लोगों पर गहरा असर हुआ . अब देश में कोल-ड्रिंक्स का बाज़ार पहले जैसा नहीं रहा . लोग दुकानों में कोल-ड्रिंक्स खरीदने वाले नासमझों को अब  आश्चर्य से देखते हैं .  इन तमाम पहलुओं पर अगर बारीकी से गौर किया जाए तो आसानी से समझा जा सकता है कि बाबा रामदेव की जान को किन लोगों से ख़तरा हो सकता है . बाबा इस देश और दुनिया को अच्छे रास्ते पर चलने की सीख दे रहे हैं . ऐसे में स्वाभाविक है कि समाज को बुराई के रास्ते पर धकेल कर स्वार्थ की रोटी सेंकने वालों के काले कारोबार पर बुरा असर तो होगा . मानव-समाज में छुपे ऐसे दानवों को लगता है कि बाबा के ओजस्वी विचारों के आगे उनकी एक नहीं चलने वाली . अपनी दाल नहीं गलने पर ऐसे लोग कायरता की  किसी भी सीमा तक जा सकते हैं .बाबा इस देश और समाज की अनमोल धरोहर हैं. वे भारत माता के अनमोल रत्न हैं . उनकी सुरक्षा सरकार के साथ-साथ हम सबकी ज़िम्मेदारी है. क्या हम एक सामाजिक -सुरक्षा घेरा बना कर बाबा की हिफाज़त नहीं कर सकते ? अगर  भ्रष्टाचार करने वालों, कालाबाजारियों , मिलावटखोरों , शराब और नशा बेचने वालों को हम सब एक होकर ललकारें ,तो बाबा की रक्षा के लिए सामाजिक-सुरक्षा घेरा अपने-आप बनता और बढ़ता चला जाएगा . ऐसा दिन आखिर कब आएगा ? सोचता हूँ , आखिर कहाँ से होगी शुरुआत ?
स्वराज्य करुण

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Posted by on Jan 11 2011. Filed under futured, लेख, समाज, सम्पादकीय. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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