विश्व वार्ता

वेब मीडिया का भविष्य उज्ज्वल

मीडिया की जरूरत प्राचीनकाल में भी थी और आधाुनिक काल में भी है। यह अलग बात है कि समय में बदलाव के साथ-साथ तकनीक के विकास ने इसको कई प्रकारों में विभक्त कर दिया है पर मीडिया की जरूरत आज भी है और आने वाले समय में भी रहेगी। तकनीक वह चीज है जो एक समय बाद या तो खुद बदल जाती है या अपने साथ समेटे माधयमों को भी बदलने पर विवश कर देती है। या कहें तो यह समय की जरूरत बन जाती है।

कहना न होगा कि देश के साथ ही विदेशों में भी जिस तरह से मीडिया की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, उससे इसके माधयम महत्वपूर्ण हो गए हैं। एक जमाना था जब मीडिया अपने शुरुआती काल में था तो मौखिक या लिखित रूप से संदेश पहुंचाए जाते थे। इसके बाद इसका स्थान टेबुलाइट अखबारों ने ले लिया। धीरे-धीरे तकनीक के विकास और समय के अनुसार बदलने की मांग के बाद इसने छोटे अखबारों का रूप लिया।

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इन सबके बाद तकनीक के विकास ने प्रिंट मीडिया के बाद इलेक्ट्रानिक मीडिया का उद्भव हुआ। इलेक्ट्रानिक मीडिया के आने के बाद तो यहां तक कहा जाने लगा था कि अब प्रिंट मीडिया के दिन लद जाएंगे और वह दिन दूर नहीं जब प्रिंट मीडिया के बजाय लोग इलेक्ट्रानिक मीडिया की ओर आकर्षित होंगे।

शुरुआत में तो यही लगा था, किन्तु आज भी प्रिंट मीडिया बरकरार है, बल्कि पहले से भी अधिाक तेजी से विकास की राह पर अग्रसर है। इलेक्ट्रानिक मीडिया में खबरों की जीवंतता और बेडरूम में बैठकर ही देश-दुनिया की खबरों से रूबरू होने से इसकी शुरुआत चौकाने वाली लग रही थी, पर यह आशंका निर्मूल साबित हुई और आज हालात यह हैं कि विदेशों के साथ ही खासकर भारत में प्रिंट मीडिया ने नए आयाम स्थापित किये हैं।

इस सबमें खास बात यह है कि भारत में प्रिंट मीडिया में सबसे ज्यादा भाषायी अखबारों के रूप में मीडिया ने उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है और आज देश का अधिाकांश भाग समाचार पत्रों की पकड़ में है। यह अलग बात है कि दूसरी ओर ग्रामीण भारत का बड़ा हिस्सा आज भी अखबारों की पहुंच से दूर है।

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यहां तक की इलेक्ट्रानिक मीडिया के आने के बाद भी आज ग्रामीण क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा मीडिया की पहुंच से दूर है। कहने को तो सरकारी टेलीविजन चौनल दूरदर्शन की पकड़ देश के गांवों तक जरूर है, किन्तु यह चौनल, समाचार चौनल न होकर सिर्फ मनोरंजन का साधान बनकर रह गया है।

हालांकि इसमें सुबह-शाम समाचार बुलेटिन का प्रसारण होता है, किन्तु ग्रामीण व दूरस्थ अंचलों में कहीं बिजली तो कहीं दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में सिग्रलों के अभाव में इसकी भी पहुंच संभव नहीं हो पा रही है। ऐसे में देश में भविष्य में मीडिया के रूप में चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या फिर इलेक्ट्रानिक मीडिया। इनका विस्तार भविष्य में और तेजी से होगा। तभी देश का भला हो सकता है।