वक्फ संशोधन बिल पर संसद में गरमागरम बहस, सरकार और विपक्ष आमने-सामने
लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पर बहस शुरू होते ही केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। यह विधेयक मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े कानूनों में बदलाव करने का प्रस्ताव रखता है।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए उसने वक्फ कानूनों में “संदिग्ध” बदलाव किए थे। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने 123 महत्वपूर्ण इमारतों को वक्फ को सौंप दिया था और अगर रोका नहीं जाता तो संसद भवन भी वक्फ संपत्ति घोषित हो सकता था।
विपक्ष का तीखा जवाब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मंत्री रिजिजू के बयान को “भ्रामक” बताया और वक्फ संशोधन बिल को “संविधान पर हमला” करार दिया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यह विधेयक 2023 में अल्पसंख्यक मामलों की संसदीय समिति की चार बैठकों में क्यों नहीं लाया गया।
गोगोई ने इस संशोधन विधेयक में एक नई शर्त का विरोध किया, जिसमें वक्फ बोर्ड को दान देने वाले व्यक्ति को कम से कम पांच वर्षों तक मुस्लिम धर्म का पालन करने की अनिवार्यता रखी गई है। उन्होंने कहा, “क्या अब सरकार धार्मिक प्रमाणपत्र जारी करेगी? अन्य धर्मों के लिए भी ऐसा प्रावधान होगा? यह कौन सा न्याय है?”
सरकार का रुख किरण रिजिजू ने साफ किया कि यह विधेयक केवल संपत्ति प्रबंधन से संबंधित है और इसका धार्मिक आस्थाओं से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वक्फ कानून में एक “कठोर प्रावधान” हटाया है, जो किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित करने की अनुमति देता था। उनके अनुसार, इस प्रावधान का दुरुपयोग कर कई मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया था।
संसदीय समिति और विवाद इस विधेयक को पहली बार अगस्त 2023 में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया। इस समिति ने फरवरी में अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि उनकी राय को नजरअंदाज किया गया।
कुल 66 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से 44 विपक्ष द्वारा और 23 भाजपा व सहयोगी दलों द्वारा दिए गए थे। विपक्ष के सभी संशोधनों को खारिज कर दिया गया, जबकि सत्तारूढ़ दल के 14 संशोधनों को मंजूरी मिली।
गृह मंत्री अमित शाह का जवाब बहस के दौरान जब विपक्ष ने संसदीय समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, तो गृह मंत्री अमित शाह ने सफाई दी कि समिति ने केवल सुझाव दिए थे और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार ने लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना वजह मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर संसद में बहस जारी है। विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला बता रहा है, जबकि सरकार इसे संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता लाने वाला कानून बता रही है। आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विधेयक किस दिशा में आगे बढ़ता है।