आचार्य ललित मुनि

futuredधर्म-अध्यात्म

सृजनशील भारत के लिए सतत् प्रेरणा भगवान विश्वकर्मा

विश्वकर्मा जयंती सृजन, श्रम और निर्माण की भारतीय परंपरा का प्रतीक है। यह आलेख सृजनशील भारत के लिए विश्वकर्मा दर्शन की प्रासंगिकता को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

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futuredधर्म-अध्यात्म

हैदर अली के आक्रमण से रुका महामाघ मामंकम सनातन उत्सव 250 साल बाद पुन: प्रारंभ

तिरुनावाया में आयोजित महामाघ महोत्सव 2026 के माध्यम से प्राचीन मामंकम उत्सव का पुनरुद्धार, केरल की सनातन परंपरा, इतिहास और सामाजिक एकता का विस्तृत विश्लेषण।

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futuredहमारे नायक

स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना: आत्मगौरव से राष्ट्रनिर्माण तक

स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना पर केंद्रित यह आलेख बताता है कि आत्मगौरव, सेवा, वेदांत और युवाशक्ति के माध्यम से उन्होंने आधुनिक भारत की वैचारिक नींव कैसे रखी।

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futuredलोक-संस्कृति

आस्था, इतिहास और भारतीय चेतना का महापर्व माघ मेला

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर लगने वाला माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था, तप और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। इसका पौराणिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व जानिए।

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futuredलोक-संस्कृति

सहकारिता और सामाजिक समरसता का उत्सव छेरछेरा

छत्तीसगढ़ का छेरछेरा पर्व फसल कटाई, दान परंपरा और सहकारिता का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक एकता, जैव विविधता संरक्षण और लोक संस्कृति को सहेजता है।

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futuredपॉजिटिव स्टोरी

साल के अंत में अपने को कैसे और क्यों परखें?

साल का अंत केवल उपलब्धियों का हिसाब नहीं, बल्कि आत्मपरीक्षण का अवसर है। जानिए कि वर्ष के अंत में खुद को कैसे और क्यों परखें, ताकि जीवन की दिशा और सोच को बेहतर बनाया जा सके।

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