स्वतंत्रता संग्राम

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रानी लक्ष्मीबाई के बाद पहली शहीद महिला क्रांतिकारी

प्रीतिलता वाद्देदार, भारत की साहसी क्रांतिकारी, जिन्होंने 24 सितम्बर 1932 को अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए प्राणों का बलिदान दिया। रानी लक्ष्मीबाई के बाद उनका बलिदान स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा है।

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क्रांतिकारी जोरावर सिंह बारहठ: राष्ट्रसेवा में समर्पित जीवन

जोरावर सिंह बारहठ राजस्थान के वे क्रांतिकारी थे जिन्होंने 1912 में वायसराय हार्डिंग पर बम हमला कर ब्रिटिश शासन को हिला दिया। साधु वेश में जीवन बिताकर भी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को नया आयाम दिया। जानिए उनके बलिदान और संघर्ष की गाथा।

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भारतीय स्वातंत्र्य समर के अमर क्रांतिकारी बाघा जतिन

बाघा जतिन उर्फ़ जतिनन्द्र नाथ मुखर्जी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के वीर सपूत थे। 10 सितंबर 1915 को उन्होंने अंग्रेजी शासन से लोहा लेते हुए अपना बलिदान दिया।

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साहित्य और पत्रकारिता का एक स्वर्णिम अध्याय हुआ समाप्त : हमेशा याद आएंगे आशीष सिंह

वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार आशीष सिंह का निधन, छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और पत्रकारिता बिरादरी में शोक की लहर। तीन दशकों से अधिक सक्रिय रहे आशीष सिंह ने अनेक कृतियों और संपादन से साहित्य जगत को समृद्ध किया।

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स्वतंत्रता संग्राम के बहुआयामी योद्धा: क्रांतिकारी भूपेन्द्रनाथ दत्त

क्रांतिकारी भूपेन्द्रनाथ दत्त का जीवन स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक जागरण और किसान आंदोलनों से जुड़ा रहा। गदर पार्टी से लेकर इंडियन इंडिपेंडेंस कमेटी और कांग्रेस तक उनकी भूमिका बहुआयामी रही।

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बिठूर की तेरह वर्षीय बलिदानी नायिका मैनादेवी : स्वातंत्र्य समर

1857 की क्रांति में बिठूर की 13 वर्षीय मैनादेवी ने अंग्रेजों की यातनाएँ झेलकर भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा और 3 सितम्बर 1857 को जीवित जलाई गईं। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा है।

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