यदि वन न रहें तो…वन से आत्मसंवाद
“यदि वन न रहें तो…” विषय पर यह भावनात्मक और तथ्यात्मक आलेख जंगल में चलते एक व्यक्ति के आत्मसंवाद के माध्यम से वन संरक्षण, जनसंख्या दबाव और भविष्य की चुनौतियों को प्रस्तुत करता है।
Read More“यदि वन न रहें तो…” विषय पर यह भावनात्मक और तथ्यात्मक आलेख जंगल में चलते एक व्यक्ति के आत्मसंवाद के माध्यम से वन संरक्षण, जनसंख्या दबाव और भविष्य की चुनौतियों को प्रस्तुत करता है।
Read Moreदेवरी में वनमंडल बलौदाबाजार द्वारा आयोजित ‘जल-जंगल यात्रा’ के तहत विद्यार्थियों और ग्रामीणों को वन्यजीव, वनस्पतियों और जल संरक्षण की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में वृक्षारोपण और करियर मार्गदर्शन भी शामिल रहा।
Read Moreसुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को कांछा गाचीबोवली वन क्षेत्र में पेड़ काटने की गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया। यह कदम राज्य द्वारा आईटी पार्क के लिए भूमि नीलामी की योजना के तहत पेड़ काटने के बाद उठाया गया, जबकि कोर्ट ने पर्यावरणीय अनुमति की अनुपलब्धता पर सवाल उठाए।
Read Moreसुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के कंचा गाचीबोवली वन क्षेत्र में पेड़ कटाई पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक इस क्षेत्र में पेड़ न काटे जाएं और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने को कहा। यह कदम वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा के लिए उठाया गया है।
Read Moreछत्तीसगढ़ में देश का तीसरा सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला, जल्द ही अस्तित्व में आएगा। यह नया बाघ अभयारण्य 2829.387 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला होगा और इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन क्षेत्रों को एकीकृत करके बनाया गया है। इस निर्णय से बाघों की सुरक्षा और संख्या में सुधार की उम्मीद है, साथ ही यह क्षेत्र इको-टूरिज़्म और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।”
Read Moreजीवन और पर्यावरण का अटूट सम्बन्ध है। पर्यावरण में ही सूक्ष्म जीवाणु से लेकर कीड़े-मकोड़े, जीव-जंतु, पेड़-पौधे जन्म लेते और
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