मराठा साम्राज्य

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19 नवम्बर1828 रानी लक्ष्मीबाई का जन्म राष्ट्र और संस्कृति रक्षा का अद्भुत संघर्ष

भारत के स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को बनारस में मणिकर्णिका के रूप में हुआ। वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से झाँसी, कालपी और ग्वालियर में अदम्य साहस से युद्ध लड़ा और 18 जून 1858 को रणभूमि में वीरगति प्राप्त की। उनका जीवन त्याग, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक इतिहास है।

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मराठा सैन्य परिदृश्य को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया

मराठा सैन्य परिदृश्य, जिसमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु के 12 किले शामिल हैं, को 2025 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया, जो मराठा साम्राज्य की सैन्य और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

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धर्म की दीपिका अहिल्या माई : काव्य रचना

माता अहिल्याबाई होलकर के जीवन और कार्यों पर आधारित एक भावात्मक काव्यात्मक कविता जो नारी शक्ति, धर्मपालन, सेवा और राष्ट्रनिर्माण की भावना से ओतप्रोत है ।

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सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अग्रदूत: पुण्यश्लोका अहिल्याबाई

पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई ऐसी ही विलक्षण विभूति थीं, जो पूरे भारत राष्ट्र, समाज और संस्कृति के लिये समर्पित रहीं। वे एक छोटे से राज्य इंदौर की शासक थीं, पर उनके हृदय में पूरा भारत राष्ट्र समाया हुआ था।

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वीर संभाजी महाराज का बलिदान: धर्म और स्वाभिमान की अद्वितीय मिसाल

छत्रपति संभाजी महाराज भारतीय इतिहास के वे अमर बलिदानी हैं, जिन्होंने औरंगजेब की क्रूर यातनाओं को झेलकर भी धर्म और देश की रक्षा की। उनका जीवन संघर्ष, शौर्य और अटूट संकल्प की मिसाल है। जानिए कैसे उन्होंने 210 युद्ध जीते और अंत तक हिंदवी स्वराज्य के लिए लड़ते हुए अमर बलिदान दिया।

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दिल्ली विजय से दोराहा संधि तक वीरता की अमर गाथा

बाजीराव पेशवा जैसी महान विभूतियों का बलिदान है, जिससे आज भारत का स्वत्व प्रतिष्ठित हो रहा है। ऐसे महान यौद्धा का आज 28 अप्रैल को निर्वाण दिवस है। उनका पूरा जीवन युद्ध में बीता।

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