भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

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जिनके गीतों ने स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण को स्वर दिया : कवि प्रदीप

कवि प्रदीप के जीवन और राष्ट्रभक्ति गीतों की प्रेरक यात्रा, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्रनिर्माण तक भारत की आत्मा को स्वर दिया।

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जेल की सलाखों के पार भी जीवित रही क्रांति: बारीन्द्रनाथ घोष

क्राँतिकारी पत्रकार बारीन्द्रनाथ घोष का जीवन परिचय, अनुशीलन समिति में भूमिका, अलीपुर बम कांड, कालापानी कारावास और स्वतंत्रता के बाद की पत्रकारिता यात्रा।

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महामना पंडित मदनमोहन मालवीय: राष्ट्र, संस्कृति और शिक्षा के महान साधक

महामना पंडित मदनमोहन मालवीय के जीवन, विचारों, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, पत्रकारिता, हिन्दी भाषा सेवा और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना पर आधारित विस्तृत स्मरण आलेख।

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19 नवम्बर1828 रानी लक्ष्मीबाई का जन्म राष्ट्र और संस्कृति रक्षा का अद्भुत संघर्ष

भारत के स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को बनारस में मणिकर्णिका के रूप में हुआ। वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से झाँसी, कालपी और ग्वालियर में अदम्य साहस से युद्ध लड़ा और 18 जून 1858 को रणभूमि में वीरगति प्राप्त की। उनका जीवन त्याग, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक इतिहास है।

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22 अगस्त 1930 : बैतूल में वनवासी आँदोलन : पुलिस गोली चालन : एक बलिदान: अनेक घायल

22 अगस्त 1930 को बैतूल में वनवासियों ने अपने वनाधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन छेड़ा। अंग्रेज पुलिस की गोलीबारी में एक वनवासी शहीद हुआ और अनेक घायल हुए। इस संघर्ष का नेतृत्व गंजन सिंह कोरकू ने किया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर रायपुर जेल भेजा गया।

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बचपन में फाँसी चढ़ने वाले भारत के अमर क्रांतिकारी

खुदीराम बोस भारत के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने 19 वर्ष से पहले ही फाँसी का सामना किया। जानिए उनका जन्म, संघर्ष, क्रांतिकारी गतिविधियाँ और अदम्य बलिदान की पूरी कहानी।

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