जब तीन युवाओं ने इतिहास की दिशा बदल दी
23 मार्च 1931 की वह ऐतिहासिक शाम, जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते-हँसते फाँसी स्वीकार की। लाहौर षड्यंत्र केस, क्रांतिकारी आंदोलन और शहादत की प्रेरक गाथा पर विस्तृत आलेख।
Read More23 मार्च 1931 की वह ऐतिहासिक शाम, जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते-हँसते फाँसी स्वीकार की। लाहौर षड्यंत्र केस, क्रांतिकारी आंदोलन और शहादत की प्रेरक गाथा पर विस्तृत आलेख।
Read Moreकवि प्रदीप के जीवन और राष्ट्रभक्ति गीतों की प्रेरक यात्रा, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्रनिर्माण तक भारत की आत्मा को स्वर दिया।
Read Moreक्राँतिकारी पत्रकार बारीन्द्रनाथ घोष का जीवन परिचय, अनुशीलन समिति में भूमिका, अलीपुर बम कांड, कालापानी कारावास और स्वतंत्रता के बाद की पत्रकारिता यात्रा।
Read Moreमहामना पंडित मदनमोहन मालवीय के जीवन, विचारों, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, पत्रकारिता, हिन्दी भाषा सेवा और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना पर आधारित विस्तृत स्मरण आलेख।
Read Moreभारत के स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को बनारस में मणिकर्णिका के रूप में हुआ। वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से झाँसी, कालपी और ग्वालियर में अदम्य साहस से युद्ध लड़ा और 18 जून 1858 को रणभूमि में वीरगति प्राप्त की। उनका जीवन त्याग, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक इतिहास है।
Read More22 अगस्त 1930 को बैतूल में वनवासियों ने अपने वनाधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन छेड़ा। अंग्रेज पुलिस की गोलीबारी में एक वनवासी शहीद हुआ और अनेक घायल हुए। इस संघर्ष का नेतृत्व गंजन सिंह कोरकू ने किया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर रायपुर जेल भेजा गया।
Read More