भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

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22 अगस्त 1930 : बैतूल में वनवासी आँदोलन : पुलिस गोली चालन : एक बलिदान: अनेक घायल

22 अगस्त 1930 को बैतूल में वनवासियों ने अपने वनाधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन छेड़ा। अंग्रेज पुलिस की गोलीबारी में एक वनवासी शहीद हुआ और अनेक घायल हुए। इस संघर्ष का नेतृत्व गंजन सिंह कोरकू ने किया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर रायपुर जेल भेजा गया।

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बचपन में फाँसी चढ़ने वाले भारत के अमर क्रांतिकारी

खुदीराम बोस भारत के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने 19 वर्ष से पहले ही फाँसी का सामना किया। जानिए उनका जन्म, संघर्ष, क्रांतिकारी गतिविधियाँ और अदम्य बलिदान की पूरी कहानी।

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गाय की चर्बी के कारतूस विवाद से शुरू हुआ संतावन का गदर : मंगल पाण्डेय

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रान्ति को सब जानते हैं। यह एक ऐसा सशस्त्र संघर्ष था जो पूरे देश में एक साथ हुआ। इसमें सैनिकों और स्वाभिमान सम्पन्न रियासतों ने हिस्सा लिया। असंख्य प्राणों की आहूतियाँ हुईं थी। इस संघर्ष का सूत्रपात करने वाले स्वाभिमानी सिपाही मंगल पाण्डेय थे।

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जेल यात्रा और संविधान सभा तक का सफर : पृथ्वी सिंह आजाद

ऐसे चिंतक विचारक और क्राँतिकारी पृथ्वी सिंह आजाद का जन्म 15 सितंबर 1892 को पंजाब प्रांत के मोहाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लालरू में हुआ था। इन दिनों इस क्षेत्र को साहिबजादा अजीतसिंह नगर के नाम से जाना जाता है।

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चार्ल्स टेगार्ट पर हमले की योजना और गोपीनाथ साहा का बलिदान

पराधीनता के दिनों में कुछ अंग्रेज अधिकारी ऐसे थे जो अपने क्रूरतम मानसिकता के चलते भारतीय स्वाधीनता सेनानियों से अमानवीयता की सीमा भी पार जाते थे। बंगाल में पदस्थ ऐसा ही अधिकारी चार्ल्स ट्रेगार्ट था। जिसे मौत के घाट उतारने का निर्णय सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी गोपीनाथ साहा ने लिया। समय पर हमला बोला वह बच गया लेकिन एक अन्य नागरिक मारा गया जिस आरोप में साहा को फाँसी दी गई ।

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ऐसे बलिदानी क्राँतिकारी हैं जिन्हें दो बार आजीवन कारावास हुआ

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अकेले ऐसे बलिदानी क्राँतिकारी हैं जिन्हें दो बार आजीवन कारावास हुआ, उनका पूरा जीवन तिहरे संघर्ष से भरा  है। एक संघर्ष राष्ट्र की संस्कृति और परंपरा की पुनर्स्थापना के लिये किया। दूसरा संघर्ष अंग्रेजों से मुक्ति केलिये। और तीसरा संघर्ष भारत के अपने ही बंधुओं के लांछन के झाँछन झेलने का।

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