नमामि बुद्धम्

बुद्ध प्रसन्न होंगे ——
निर्मल सरोवरों में अधडूबे, हंसों की तैराहट पर, जिसमें खेलती हो मछलियां, निर्द्वंद, निर्विरोध, निर्विवाद, बुद्ध प्रसन्न होंगे –नदियों की निर्मलता से, उनके जर्जर, कर्कग्रस्त शरीर से मुक्त होने पर, जिन्हें हम केवल अपने स्वार्थ के लिए, साधते जा रहे हैं। बालुओं का होता शहरीकरण. ग अपहरण है नदियों का

Read more

कठिन कथा सीता की

बहुत सरल है राम समझना कठिन कथा सीता की। जिसने अपनी त्याग तपस्या किए सिद्ध गीता सी। चरित परम पावन

Read more

नींव हूँ बुनियाद हूं

नींव हूँ बुनियाद हूं
हां मैं ही विकास हूं।
बाग में उद्यान में
संसद के हर मुकाम में
श्रमित धरोहर हूँ।
हां मैं मजदूर हूं।

Read more

जब जब आता है यह मौसम

पांव के नीचे धरती जलती, सिर ऊपर आकाश,
जब जब आता है यह मौसम करने यहां प्रवास

Read more