भारतीय संस्कृति के संरक्षण में ऋषि परंपरा की भूमिका और पराशर ऋषि
18 अप्रैल को मनाई जाने वाली पराशर ऋषि जयंती का महत्व, महर्षि पराशर का जीवन, विष्णु पुराण की रचना, ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र में उनका योगदान और भारतीय संस्कृति पर प्रभाव।
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Read Moreदक्षिण कोसल की ऐतिहासिक विरासत के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अध्ययन, जिसमें सिरपुर, रतनपुर, भोरमदेव, शिलालेख, मंदिर स्थापत्य और प्राचीन नगरों की परंपरा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।
Read Moreछत्तीसगढ़ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में लोकपरंपराएँ, लोकनृत्य, लोककला और जनजातीय जीवन प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त आधार प्रस्तुत करते हैं।
Read Moreबोहाग बिहू असम का रंगीन त्योहार है जो पर्यावरण चेतना, जैव विविधता संरक्षण, पशु कल्याण और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। गोरु बिहू, मनुह बिहू, बिहू नृत्य और सामूहिक उत्सव के माध्यम से यह प्रकृति सम्मान तथा सामाजिक एकता का प्रेरणादायक संदेश देता है।
Read More“माणिक्य देवी : बस्तर में एक शक्तिपीठ” पुस्तक की समीक्षात्मक प्रस्तुति, जिसमें बस्तर के इतिहास, चक्रकोट राज्य, शिलालेखों, मंदिर स्थापत्य, छिंदक नागवंश तथा दंतेश्वरी परंपरा के प्रमाणिक अध्ययन का विश्लेषण किया गया है।
Read More13 अप्रैल 1919 के जालियांवाला बाग हत्याकांड ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। बैसाखी के दिन निहत्थे लोगों पर हुई गोलीबारी ने राष्ट्र चेतना को झकझोर दिया और आजादी के संघर्ष को तेज किया।
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