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स्व-सहायता समूहों की पहल से सूरजपुर में पोषण और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा

रायपुर, 06 जनवरी 2025 / आर्थिक रूप से सशक्तिकरण की ठोस नींव सशक्त मानसिकता पर आधारित होती है। दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास व्यक्ति को सफलता की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। इसी सोच को व्यवहार में उतारते हुए सूरजपुर जिला की महिला स्व-सहायता समूहों ने आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल प्रस्तुत की है। ये महिलाएं न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि जिले की महिलाओं एवं बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के अभियान में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

पोषण और महिला सशक्तिकरण का समन्वय

रेडी-टू-ईट (RTE) पोषण आहार निर्माण संयंत्र सरकार द्वारा संचालित ऐसी इकाइयाँ हैं, जिनका संचालन महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जाता है। इन संयंत्रों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य योजनाओं के अंतर्गत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के लिए पहले से तैयार, पौष्टिक भोजन का निर्माण किया जाता है। इसमें गेहूं, दालें और दूध जैसे घटक शामिल होते हैं, जो प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इस व्यवस्था से पोषण सुनिश्चित होने के साथ-साथ महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण भी होता है।

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स्वादिष्ट और पौष्टिक आहार का निर्माण

जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तत्काल उपभोग हेतु तैयार पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) निर्माण संयंत्रों की शुरुआत की गई है। इन संयंत्रों में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार किया जा रहा है। ये आहार विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, पाइरीडॉक्सिन, फोलिक अम्ल, कोबालामिन, आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर हैं।

तीन संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत

जिला प्रशासन द्वारा कुल 07 पोषण आहार निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंड में तीन संयंत्रों का सफल संचालन किया जा रहा है। इन तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न हैं। तैयार पोषण आहार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को निःशुल्क वितरित किया जा रहा है।

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इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पोषण आहार के निर्माण के साथ-साथ उसके वितरण की जिम्मेदारी भी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी गई है। इससे महिलाओं की भागीदारी और उत्तरदायित्व दोनों में वृद्धि हुई है।

430 महिलाएं वितरण कार्य में सक्रिय

भैयाथान विकासखंड में 15, सूरजपुर विकासखंड में 15 तथा प्रतापपुर विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूह सक्रिय रूप से पोषण आहार वितरण कार्य में लगे हुए हैं। इन समूहों के माध्यम से कुल 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।

इस योजना से स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। मानसिक रूप से सशक्त ये महिलाएं अब घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ आजीविका से भी जुड़ रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल न केवल जिले में पोषण स्तर सुधारने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी है।

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