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सुप्रीम कोर्ट ने हटाए गए मतदाताओं को अंतरिम मतदान अधिकार देने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं और जिनकी अपीलें अभी लंबित हैं, उन्हें अंतरिम रूप से मतदान का अधिकार देने से इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले से आगामी दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर बड़ा असर पड़ सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि अब तक करीब 16 लाख अपीलें दायर की जा चुकी हैं। उन्होंने मांग की कि जिन लोगों की अपीलें लंबित हैं, उन्हें इस महीने होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी जाए।

मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा

इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा करना संभव नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि इस तरह की अनुमति दी जाती है, तो पूरी प्रक्रिया प्रभावित होगी और कानूनी स्थिति जटिल हो सकती है।

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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल लंबित अपीलों का निपटारा संबंधित अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

क्या है मामला

हाल ही में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के तहत बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे। इसके बाद प्रभावित मतदाताओं ने विभिन्न अपीलीय मंचों पर याचिकाएं दाखिल की हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि जिन मतदाताओं के मामले अभी विचाराधीन हैं, वे अंतरिम राहत के रूप में मतदान अधिकार नहीं पा सकेंगे।