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मनरेगा श्रमिक बन रहे कुशल राज मिस्त्री, सुकमा में आत्मनिर्भरता की नई कहानी

रायपुर, 13 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील, समावेशी और जनकल्याणकारी सोच का प्रभाव अब सुदूर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन का उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि आमजन के जीवन में सम्मानजनक और स्थायी बदलाव लाना है। इसी सोच का जीवंत उदाहरण सुकमा जिले में देखने को मिल रहा है, जहाँ मनरेगा के अकुशल श्रमिक अब कुशल राज मिस्त्री बनकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

जिला प्रशासन द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के समन्वय से ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से मनरेगा में पंजीकृत 30 श्रमिकों के लिए विशेष राज मिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान ईंट-चिनाई, भवन ले-आउट, प्लिंथ से छत तक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

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यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है, जब सुकमा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2024–26 के लिए 25,974 आवास स्वीकृत किए गए हैं। कलेक्टर अमित कुमार एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रारंभ यह प्रयास दोहरे उद्देश्य को साध रहा है। एक ओर स्थानीय स्तर पर दक्ष राज मिस्त्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को अपने ही गांव और आसपास सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

इस कौशल उन्नयन से श्रमिकों की आय में वृद्धि होगी और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और कौशल विकास का यह त्रिवेणी संगम सुकमा जैसे दूरस्थ जिले में आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत कर रहा है।

राज मिस्त्री का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे जैमेर गांव के चेतननाल का कहना है कि यह केवल ईंट-गारे का काम नहीं, बल्कि स्वाभिमान और आत्मसम्मान के साथ रोजगार प्राप्त करने का माध्यम है। अब काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और आमदनी भी पहले से बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि अब वे दूसरों के घरों का निर्माण करने के साथ-साथ अपने सपनों को भी साकार करने में सक्षम होंगे।

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