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सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सामाजिक समरसता भवन के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की

रायपुर, 7 जनवरी 2026 / विष्णु देव साय ने आज गरियाबंद जिला के सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना की तथा सिरकट्टी आश्रम को सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए आश्रम परिसर में समरसता भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद देशभर में जो आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित हुआ है, उसी की अखंड धारा का विस्तार आज सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों, साधु-संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की पवित्र भूमि है और हमें धर्म को केवल आस्था के रूप में नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय इसी भूमि पर व्यतीत किया। दंडकारण्य के रूप में विख्यात अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र, जो कभी नक्सल समस्या से प्रभावित था, आज तेजी से नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की निशुल्क तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत भी अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के पांच शक्तिपीठों के विकास का कार्य भी निरंतर प्रगति पर है। भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि रतनपुर के विकास के लिए भी प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी भव्य स्वरूप में किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरकट्टी धाम स्थित श्रीरामजानकी मंदिर का भव्य स्वरूप जनसहभागिता का अनुपम उदाहरण है। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर बीते दस वर्षों की साधना और तपस्या का परिणाम है। राजस्थान के शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट और छड़ के उपयोग से निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। उन्होंने मंदिर निर्माण में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आस्था और एकजुटता का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल परंपरागत ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रतीक है।

केबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा की स्थापना का साक्षी बनना सभी के लिए एक अलौकिक अनुभव है। कार्यक्रम में सिरकट्टी आश्रम के महामंडलेश्वर महंत संत गोवर्धन शरण व्यास ने स्वागत उद्बोधन में आश्रम की स्थापना, उसकी आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला।

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इस अवसर पर सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक सर्वश्री रोहित साहू और दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गौरीशंकर कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, देश के विभिन्न स्थानों से आए संत-महात्मा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।