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दिवंगत कवि श्रीराम साहू ‘अकेला’ की प्रथम पुण्यतिथि पर बसना में साहित्यकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

बसना, 01 सितम्बर 2025। साहित्य जगत में अपनी क्षणिका-कविताओं के लिए विशिष्ट पहचान रखने वाले दिवंगत कवि श्रीराम साहू ‘अकेला’ की प्रथम पुण्यतिथि पर साहित्यकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन रविवार 31 अगस्त की शाम को ग्राम खटखटी (तहसील बसना, जिला महासमुन्द) स्थित बद्रीका आश्रम की नर्सरी में हुआ।

इस श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन अंकुर साहित्य समिति, बसना तथा कला कौशल जनसेवा संस्थान, छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आश्रम और नर्सरी के संस्थापक व साहित्यकार बद्री प्रसाद पुरोहित, जो कवि श्रीराम साहू के अभिन्न मित्र रहे हैं, ने पूरे आयोजन का नेतृत्व किया।

स्वर्गीय श्रीराम साहू मूलतः ग्राम बंसूला (बसना के निकट) के निवासी थे। अपने लेखन में उन्होंने सामाजिक विसंगतियों, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन समस्याओं पर तीखे प्रहार किए। उनकी क्षणिकाओं का संग्रह ‘डेढ़ इंच मुस्कान’ पाठकों में विशेष रूप से लोकप्रिय रहा। वे लघुकथा लेखन में भी सक्रिय थे और स्थानीय साहित्यिक जगत में अपनी अलग छाप छोड़ गए।

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कार्यक्रम की शुरुआत उनके चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पगुच्छ अर्पित करके की गई। इसके पश्चात् उनके साहित्यिक योगदान, व्यक्तित्व और उनसे जुड़ी स्मृतियों को साझा किया गया।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में एक काव्य-गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें कवि ‘अकेला’ को समर्पित रचनाएँ प्रस्तुत की गईं।

इस अवसर पर बसना और पिथौरा क्षेत्र के अनेक साहित्यकार एवं कवि उपस्थित थे। इनमें बद्री प्रसाद पुरोहित, कुमार लोरीश, क्षीरोद्र पुरोहित, डिजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’, प्रेमचंद साव ‘प्रेम’, ललित भार, टिकेन्द्र साहू, टिकेलाल साहू, प्रवीण प्रवाह, स्वराज्य करुण और उमेश दीक्षित प्रमुख रहे। संचालन कुमार लोरीश (ग्राम जगदीशपुर) ने किया।

विशेष उल्लेखनीय रहा कि इस अवसर पर फेसबुक पर साझा की गई स्वराज्य करुण की स्मृति-पोस्ट को भी पढ़कर सुनाया गया। उसमें सांध्य दैनिक ‘छत्तीसगढ़’ के प्रधान संपादक सुनील कुमार की टिप्पणी को उद्धृत किया गया। उन्होंने लिखा—

“मुझे उनसे मुलाकात तो याद नहीं है, लेकिन पिछले कई दशकों में मेरे लिखे हुए पर उनके पोस्टकार्ड आते थे। बाद के बरसों में वह असहमति अधिक दर्ज करते थे, लेकिन फिर भी मुझको अच्छा लगता था कि बारीकी से पढ़कर उन्होंने लिखने की जहमत उठाई थी। मेरी श्रद्धांजलि।”

आयोजन के अंत में स्वर्गीय कवि की स्मृति को जीवंत रखने के उद्देश्य से नर्सरी परिसर में पौधरोपण किया गया।

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