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मध्य पूर्व युद्ध के असर से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों की संपत्ति में 12 लाख करोड़ से अधिक की कमी

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करते ही उसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत के शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा। सोमवार सुबह कारोबार की शुरुआत में ही प्रमुख सूचकांकों में करीब 3 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आ गई।

सोमवार सुबह लगभग 10:30 बजे राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी-50 सूचकांक 686 अंकों से अधिक गिरकर 23,663 के स्तर पर पहुंच गया। यह स्तर अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। वहीं बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स भी करीब 2,190 अंकों की गिरावट के साथ 76,727 अंक पर कारोबार करता दिखाई दिया। सेंसेक्स के सभी शेयर लाल निशान में रहे।

बाजार में बढ़ती घबराहट का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स सूचकांक भी करीब 22 प्रतिशत उछलकर 24 अंक से ऊपर पहुंच गया, जो लगभग दो वर्षों का उच्चतम स्तर है।

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वैश्विक बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले। पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजारों में 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि एशियाई बाजारों में सोमवार को तेज बिकवाली देखने को मिली। जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक 7 से 8 प्रतिशत तक लुढ़क गए।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर के बाद पहली बार इतना ऊंचा स्तर है। तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा और रुपया डॉलर के मुकाबले 57 पैसे गिरकर 92.32 पर पहुंच गया। युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये पर दबाव बना हुआ है, जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक को डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।

तेल की कीमतों में उछाल का सबसे अधिक असर विमानन क्षेत्र पर देखा गया। इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयर लगभग 7 प्रतिशत तक टूट गए और यह निफ्टी-50 में सबसे बड़ी गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहा। युद्ध शुरू होने के बाद से यह शेयर 16 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है। इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एसबीआई, श्रीराम फाइनेंस और टाटा मोटर्स के कुछ शेयरों में 5 से 6 प्रतिशत तक कमजोरी दर्ज की गई।

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सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो राष्ट्रीय शेयर बाजार के सभी क्षेत्रीय सूचकांक लाल निशान में रहे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि ऑटोमोबाइल, वित्तीय सेवाओं और मीडिया से जुड़े शेयरों में भी 3 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली भी एक बड़ा कारण है। अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों के चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार यदि मध्य पूर्व का यह संघर्ष जल्द शांत होता है तो बाजार में तेज सुधार देखने को मिल सकता है। तकनीकी दृष्टि से निफ्टी के लिए 23,500 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो सूचकांक 22,000 तक फिसल सकता है और अधिक दबाव की स्थिति में 19,000 तक भी जाने की आशंका जताई जा रही है।

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मध्य पूर्व में तनाव इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि इजराइल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र के विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके साथ ही लेबनान स्थित हिज्बुल्लाह जैसे क्षेत्रीय समूहों की सक्रियता ने संघर्ष को और जटिल बना दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनौपचारिक दबाव बनाए रखने की खबरों ने वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित किया है। इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के बीमा में कठिनाई आने के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने अपने परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।