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राशनकार्ड धारकों को बड़ी राहत: बुजुर्ग और असहाय हितग्राहियों के लिए घर बैठे फेस e-KYC की सुविधा शुरू

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत पात्र सभी राशनकार्ड धारकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है। इस प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार ने अब वृद्ध, असहाय और अस्वस्थ हितग्राहियों के लिए घर बैठे चेहरा आधारित e-KYC की सुविधा शुरू कर दी है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार, 70 वर्ष से अधिक आयु के कई हितग्राहियों के अंगुलियों के निशान स्पष्ट न होने के कारण मशीनों में बायोमेट्रिक मिलान नहीं हो पा रहा था। इसके चलते उन्हें उचित मूल्य दुकानों से राशन प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शासन ने फेस रिकग्निशन आधारित e-KYC व्यवस्था लागू की है।

कैसे काम करेगी नई व्यवस्था

अब हितग्राही ‘मेरा e-KYC’ मोबाइल एप के माध्यम से अपने घर से ही आधार आधारित पहचान सत्यापन कर सकेंगे। यह सुविधा खासतौर पर उन बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए फायदेमंद होगी, जो शारीरिक रूप से दुकान तक पहुंचने में असमर्थ हैं या जिनका अंगुली आधारित सत्यापन बार-बार असफल हो रहा है।

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घर बैठे e-KYC करने की प्रक्रिया

  • अपने मोबाइल फोन में प्ले स्टोर से मेरा e-KYC और आधार फेस RD एप डाउनलोड करें।

  • एप खोलकर आधार नंबर सहित मांगी गई आवश्यक जानकारी भरें।

  • आधार से पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें।

  • फेस e-KYC विकल्प का चयन करें, कैमरा खुलते ही निर्देशानुसार चेहरा स्कैन करें।

  • सफल सत्यापन के बाद e-KYC प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

पहले से e-KYC हुआ है या नहीं, ऐसे करें जांच

हितग्राही एप में आधार नंबर और ओटीपी दर्ज कर यह भी जांच सकते हैं कि उनका e-KYC पहले से पूर्ण हुआ है या नहीं। यदि प्रक्रिया पूरी हो चुकी होगी तो स्टेटस में ‘Y’ दिखाई देगा।

ऑफलाइन सुविधा भी रहेगी उपलब्ध

यदि किसी कारणवश मोबाइल एप से e-KYC संभव न हो, तो हितग्राही अपने नजदीकी शासकीय उचित मूल्य दुकान पर जाकर अंगुली या अंगूठे के निशान के माध्यम से बायोमेट्रिक e-KYC करवा सकते हैं।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, रायपुर के नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि यह नई पहल जरूरतमंद हितग्राहियों को समय पर राशन उपलब्ध कराने और उन्हें अनावश्यक परेशानी से बचाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

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