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रायपुर में तीन महान विभूतियों की संयुक्त जयंती पर विचार-गोष्ठी, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक योगदान पर हुआ मंथन

रायपुर, 21 दिसम्बर 2025/ प्रदेश की तीन महान विभूतियों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर राजधानी रायपुर के हांडीपारा स्थित छत्तीसगढ़ी भवन में आज प्रबुद्धजनों की एक विचार-गोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक सुधार और जनजागरण में इन विभूतियों के अतुलनीय योगदान को स्मरण किया।

इन महान विभूतियों में छत्तीसगढ़ के गांधी के नाम से लोकप्रिय पंडित सुंदरलाल शर्मा, त्यागमूर्ति के रूप में विख्यात ठाकुर प्यारेलाल सिंह तथा संविधान पुरुष के नाम से जाने जाने वाले घनश्याम सिंह गुप्त शामिल थे। पंडित सुंदरलाल शर्मा का जन्म 21 दिसम्बर 1881 को राजिम में, ठाकुर प्यारेलाल सिंह का जन्म 21 दिसम्बर 1891 को ग्राम दैहान, जिला राजनांदगांव में तथा घनश्याम सिंह गुप्त का जन्म 22 दिसम्बर 1885 को दुर्ग में हुआ था। स्वतंत्रता संग्राम में तीनों की सक्रिय और प्रेरक भूमिका रही। विचार-गोष्ठी में तीनों की जयंती एक साथ मनाई गई।

कार्यक्रम की शुरुआत तीनों विभूतियों के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। लोकतंत्र सेनानी और राज्य निर्माण सेनानी जागेश्वर प्रसाद ने स्वागत भाषण दिया तथा कार्यक्रम का संचालन भी किया। राज्य निर्माण आंदोलनकारी छसपा द्वारा आयोजित इस विचार-गोष्ठी को इतिहासकार डॉ. के. के. अग्रवाल, वरिष्ठ रंगकर्मी एवं लेखक अरविन्द मिश्रा, संस्कृति कर्मी अशोक तिवारी, साहित्यकार एवं पत्रकार स्वराज्य करुण तथा राज्य निर्माण सेनानी, किसान नेता एवं पत्रकार गोवर्धन चंद्राकर ने संबोधित किया।

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वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. के. के. अग्रवाल ने पंडित सुंदरलाल शर्मा की स्वतंत्रता संग्राम और अछूतोद्धार आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पंडित सुंदरलाल शर्मा ने समाज में जन-जागरण के लिए खंड-काव्य दानलीला सहित 18 ग्रंथों की रचना की, राष्ट्रीय विद्यालय का संचालन किया तथा स्वदेशी आंदोलन, किसान आंदोलन, जंगल सत्याग्रह और नहर सत्याग्रह में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

त्यागमूर्ति ठाकुर प्यारेलाल सिंह को स्मरण करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 1919 में राजनांदगांव में लगभग 36 दिनों तक चले छत्तीसगढ़ के पहले मजदूर आंदोलन का नेतृत्व उन्होंने किया। यह आंदोलन सूती कपड़ा मिल के मजदूरों द्वारा उनकी अगुवाई में संचालित हुआ। वे सहकारिता आंदोलन के भी अग्रदूत थे। रायपुर में उच्च शिक्षा के विस्तार हेतु उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ कॉलेज की स्थापना हुई, जिसके लिए वर्ष 1937 में छत्तीसगढ़ एजुकेशन सोसायटी का गठन किया गया।

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वरिष्ठ रंगकर्मी एवं लेखक अरविन्द मिश्रा ने पंडित सुंदरलाल शर्मा के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई अनछुए प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि दानलीला खंड-काव्य के माध्यम से तत्कालीन सामाजिक और औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध प्रतीकात्मक प्रतिरोध व्यक्त किया गया था।

साहित्यकार एवं पत्रकार स्वराज्य करुण ने कहा कि पंडित सुंदरलाल शर्मा, ठाकुर प्यारेलाल सिंह और घनश्याम सिंह गुप्त की जीवन यात्रा किसी महाकाव्य से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि ठाकुर प्यारेलाल सिंह वर्ष 1950 में मध्य प्रांत और बरार की विधानसभा में रायपुर से विधायक निर्वाचित हुए और नेता प्रतिपक्ष भी बने। वे तीन बार रायपुर नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष रहे और शहर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने राष्ट्रबंधु नामक अर्ध-साप्ताहिक समाचार पत्र का संपादन किया।

घनश्याम सिंह गुप्त के योगदान पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने संविधान सभा के सदस्य के रूप में स्वतंत्र भारत के संविधान का हिंदी अनुवाद तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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संस्कृति कर्मी अशोक तिवारी ने बताया कि वर्ष 1950 के दशक में असम में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को भूमि से बेदखल किए जाने की सूचना मिलने पर ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने असम का दौरा कर वहां के गांव-गांव जाकर पीड़ितों की समस्याएं सुनीं और संबंधित सरकारों के समक्ष मुद्दा उठाया।

राज्य निर्माण सेनानी गोवर्धन चंद्राकर ने कहा कि आज शिक्षा और संचार के साधनों का विस्तार हुआ है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक शोषण किसी न किसी रूप में अब भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि हमारी महान विभूतियों ने हमेशा अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई और समाज को सही दिशा दिखाई। हमें उनके विचारों और मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए।

विचार-गोष्ठी में उर्दू शायर सुखनवर हुसैन, छत्तीसगढ़ी गीतकार रामेश्वर शर्मा, रसिक बिहारी अवधिया, गोविन्द धनगर, संजीव साहू, डॉ. श्याम लाल साकार, परसराम तिवारी, शिवनारायण ताम्रकार, मिनेश चंद्राकर, रघुनंदन साहू, श्यामू राम सेन, गंगाराम साहू, आदर्श चंद्राकर, मुकेश टिकरिहा, हिमांशु चक्रवर्ती, आशाराम देवांगन, उमैर खान, डॉ. छगन लाल सोनवानी, ऋतु महंत, रोहित चंद्रवंशी और रामकुमार देवांगन सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन जागेश्वर प्रसाद ने किया।