futuredछत्तीसगढताजा खबरें

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर राज्य सरकार का फोकस, आजीविका बढ़ाने के लिए नई रणनीति तैयार

छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित इलाकों के समग्र विकास को लेकर राज्य सरकार ने नई पहल तेज कर दी है। इसी दिशा में मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में रायपुर में राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें इन क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन और आर्थिक सशक्तिकरण पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञ संस्थाओं ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नक्सल प्रभावित और हाल ही में मुक्त हुए क्षेत्रों में स्थायी, तेज और समावेशी विकास की रूपरेखा तैयार करना रहा।

मुख्य सचिव ने कहा कि जैसे-जैसे राज्य नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है, वैसे-वैसे इन क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ाना जरूरी हो गया है। उन्होंने सभी विभागों को समन्वित दृष्टिकोण अपनाते हुए अगले तीन वर्षों के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प और लघु उद्योगों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

See also  पिछड़ा वर्ग विकास पर जोर: व्यापक सर्वेक्षण और राष्ट्रीय समन्वय की जरूरत—डॉ. कुसमरिया

आय बढ़ाने का लक्ष्य

राज्य सरकार ने वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित 8 जिलों के परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में इन क्षेत्रों के अधिकांश परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इसे अगले ढाई से तीन वर्षों में बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की योजना बनाई गई है।

क्लस्टर आधारित मॉडल पर जोर

कार्यशाला में क्लस्टर आधारित और ब्लॉक केंद्रित विकास मॉडल पर विशेष चर्चा हुई। इस मॉडल के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने, उत्पादन से लेकर विपणन तक पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने और विभिन्न विभागों की योजनाओं का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

बैठक में यह भी तय किया गया कि युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। साथ ही, उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और मूल्य सुनिश्चित करने के लिए मजबूत वैल्यू चेन विकसित की जाएगी।

60 दिनों में बनेगी कार्ययोजना

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर 60 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें सर्वे, योजना निर्माण और क्रियान्वयन की स्पष्ट रणनीति शामिल होगी।

See also  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से गोवा के मंत्री रमेश तावड़कर की मुलाकात, खेल और जनजातीय विकास पर चर्चा

इस पहल को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जो ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।