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इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेन डेका शामिल, 236 विद्यार्थियों को मिले पदक

रायपुर, 28 जनवरी 2026/ राज्यपाल रमेन डेका आज इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के 17वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न संकायों के सफल विद्यार्थियों को उपाधियाँ और स्वर्ण पदक प्रदान किए। राज्यपाल ने कहा कि कला, संगीत और संस्कृति समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कला का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज कल्याण के लिए करने का आह्वान किया।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा और धरसींवा विधायक डॉ. अनुज शर्मा उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह में 5 शोधार्थियों को डी.लिट् की उपाधि, 64 शोधार्थियों को शोध उपाधि तथा कुल 236 विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। इनमें 232 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 4 विद्यार्थियों को रजत पदक दिए गए।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि खैरागढ़ का यह संगीत विश्वविद्यालय अब “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय” के नाम से जाना जाएगा। इसके लिए उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य धरोहर ललित कलाओं के विकास में इस विश्वविद्यालय का योगदान अविस्मरणीय है।

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राज्यपाल ने कहा कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ दानवीर राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती देवी के दान का प्रतिफल है। अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए उन्होंने अपना महल दान कर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया। उन्होंने कहा कि कला राष्ट्र के जीवन का अभिन्न अंग है। संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य और साहित्य का सीधा संबंध जीवन और समाज से है। आज के भौतिकवादी युग में बढ़ती संवेदनहीनता को रोकने के लिए ललित कलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कुलाधिपति ने पदक प्राप्तकर्ताओं और उपाधि धारकों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि किसी भी समाज और देश को सभ्य एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है।

कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल प्रमाण पत्र वितरण का अवसर नहीं, बल्कि यह अपनी उपलब्धियों की समीक्षा और भविष्य के संकल्प का दिन होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है।

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कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने राजकुमारी शारदा देवी सिंह बावली की नामपट्टिका का अनावरण किया। विश्वविद्यालय परिसर में स्थित यह बावली एक प्राचीन धरोहर है, जिसका संरक्षण किया जा रहा है। आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।