कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में मिला नया प्राकृतिक चमत्कार: “ग्रीन केव” बनेगा पर्यटन का नया आकर्षण
रायपुर, 4 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ की कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इसी क्रम में कांगेर घाटी में एक और अनोखी प्राकृतिक स्थलाकृति सामने आई है, जिसे “ग्रीन केव” (ग्रीन गुफा) नाम दिया गया है। यह नई खोज क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र को और समृद्ध करने वाली मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य सरकार द्वारा पर्यटन और वन्य धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि ग्रीन केव के पर्यटन मानचित्र में शामिल होने से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को गति प्राप्त होगी। आवश्यक तैयारियां पूर्ण होते ही इस गुफा को पर्यटकों के लिए खोले जाने की योजना है।
उल्लेखनीय है कि ग्रीन केव कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित है। गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूने की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है। चूना पत्थर और शैल से निर्मित यह गुफा कांगेर घाटी की दुर्लभ और विशिष्ट गुफाओं में से एक मानी जा रही है।
ग्रीन केव तक पहुंचने का मार्ग बड़े-बड़े पत्थरों से होकर गुजरता है। गुफा में प्रवेश करते ही सूक्ष्मजीवी जमाव से ढकी हरी दीवारें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। भीतर की ओर बढ़ने पर एक विशाल कक्ष दिखाई देता है, जहां चमकदार और भव्य स्टैलेक्टाइट्स तथा फ्लो-स्टोन संरचनाएं नजर आती हैं, जो बहते पानी से बनी पत्थर की परतों के रूप में गुफा की प्राकृतिक भव्यता को और भी बढ़ा देती हैं।
घने जंगलों के मध्य स्थित यह गुफा अपनी अनोखी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनने जा रही है। वन विभाग द्वारा गुफा की सुरक्षा और नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहुंच मार्ग, पैदल पथ और अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के विकास का कार्य प्रगति पर है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन विकास के लिए किए जा रहे इन प्रयासों में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख वी. श्रीनिवासन तथा प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडे का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
