जल जीवन मिशन 2.0 के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर, छत्तीसगढ़ में ग्रामीण जल आपूर्ति को मिलेगी मजबूती
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया, जबकि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी वर्चुअली मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस पहल को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह समझौता नई गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य के करीब 82 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहले ही नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल पहुंचाया जा चुका है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना से विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को काफी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। मिशन के दूसरे चरण में जल संरक्षण, स्रोतों के पुनर्भरण और ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार से 1300 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग भी की। इससे हजारों गांवों में समूह जल आपूर्ति योजनाओं के माध्यम से पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि इस समझौते के बाद राज्य के हर घर तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ जल पहुंचाने का लक्ष्य और मजबूत होगा। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था के संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी, जबकि जिला प्रशासन निगरानी करेगा।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राज्य सरकार ने विश्वास जताया है कि इस पहल से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” के लक्ष्य को हासिल करेगा, बल्कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए मानक भी स्थापित करेगा।

