जनजातीय संसाधनों के संरक्षण के लिए बनेगी टास्क फोर्स, मुख्यमंत्री करेंगे नेतृत्व: रामविचार नेताम
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि जनजातीय समुदाय का प्रकृति से गहरा और आस्था से जुड़ा रिश्ता है, जिसे संरक्षित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह बात नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद सम्मेलन के समापन अवसर पर कही।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन से जुड़े संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की अगुवाई स्वयं मुख्यमंत्री करेंगे, ताकि नीतियों का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
प्राकृतिक संसाधनों पर विशेष फोकस
रामविचार नेताम ने कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीता आया है। पेड़-पौधों, नदियों और पहाड़ों को वे आस्था के रूप में देखते हैं, यही कारण है कि वे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण और उनके उपयोग को लेकर व्यापक चर्चा हुई है। इससे प्राप्त सुझावों को नीति निर्माण में शामिल किया जाएगा, ताकि जनजातीय समुदायों के हितों को बेहतर तरीके से सुरक्षित किया जा सके।
पेसा और वनाधिकार कानून पर जोर
मंत्री ने पेसा (PESA) और वनाधिकार अधिनियम (FRA) के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सीमांकन जैसी व्यावहारिक समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को उनके अधिकार दिलाना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।
विशेषज्ञों और समुदाय की भागीदारी
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की विशाल ‘कॉमन्स’ भूमि रही, जो ग्रामीण और जनजातीय जीवन का आधार है।
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि जनजातीय समाज की भाषा, परंपरा और जीवनशैली प्रकृति के संरक्षण से गहराई से जुड़ी है। वहीं, वन विभाग और अन्य अधिकारियों ने भी सामुदायिक सहयोग को प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आवश्यक बताया।
नई पहल की तैयारी
सम्मेलन में जनजातीय कला और लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए विशेष स्टूडियो स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। साथ ही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विकास और पर्यावरण संरक्षण को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
सरकार का कहना है कि सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी नीति निर्माण के जरिए जनजातीय क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

