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रायपुर में हैरिटेज वॉक श्रृंखला की दूसरी वॉक में युवाओं का उत्साह

रायपुर, छत्तीसगढ़ – 19 जुलाई 2024 – आज आयोजित की गई विरासत वॉक श्रृंखला की दूसरी वॉक में 75 युवाओं ने भाग लिया, जिसमें नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) रायपुर और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (आईआईएम) रायपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के युवा पर्यटन क्लब के सदस्यों के साथ-साथ नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) की 27वीं छत्तीसगढ़ बटालियन के कैडेट भी शामिल थे।

वॉक की शुरुआत छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय, रायपुर के प्रबंधक मयंक दुबे के उद्घाटन भाषण के साथ हुई। उन्होंने प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने विरासत वॉक की श्रृंखला आयोजन के लिए तय किये गए समय को प्रकाश डालते हुए आगामी 21 जुलाई से 31 जुलाई, 2024 के बीच नई दिल्ली में 46वें यूनेस्को विश्व धरोहर समिति सत्र की मेजबानी करने वाले भारत के गौरव को साझा किया। उन्होंने इस पहल के उद्देश्य पर जोर दिया कि भविष्य की पीढ़ियों के बीच रायपुर की ऐतिहासिक विरासत के मूल्य के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए। विरासत वॉक प्रतिभागियों को एक अनोखे पर्यटन स्थल की सैर पर जाने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जिससे उन्हें शहर के ऐतिहासिक स्थलों के बारे में रोचक जानकारी और अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।

आज की यात्रा लिली चौक से शुरू होकर नागरीदास मंदिर, बावलीवाले हनुमान, जैतूसाव मठ, जगन्नाथ मंदिर होते हुए तुरी हटरी पर समाप्त हुई। इस वॉक का नेतृत्व अगोरा इको-टूरिज्म के अनुभवी डॉ. आलोक कुमार साहू ने किया। उनके व्यापक ज्ञान और आकर्षक शैली ने सभी प्रतिभागियों के लिए रायपुर के इतिहास को जीवंत कर दिया। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान देने वाले जैतूसाव मठ को स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक सभा स्थल के रूप में बताकर सभी को परिचित कराया। जैतूसाव मठ का इतिहास 200 से अधिक वर्ष पुराना है। इस मठ का ऐतिहासिक महत्व है, यह उन इमारतों में से एक है, जिन से रायपुर का इतिहास जुड़ा हुआ है। यहां कभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैठक कर अपनी योजनाएं बनाया करते थे। यह मठ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले प्रदेश समेत देश भर के कई बड़े राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गढ़ रहा। 1920-21 में महात्मा गांधी पहली बार छत्तीसगढ़ आए और प्रवचन किया, कोई नेता बाहर से आता तो मठ में ही ठहरता।

एनसीसी की 27वीं सीजी बटालियन के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रदीप नायर ने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रायपुर के निवासी होने के बावजूद कई कैडेट और अधिकारी शहर के विरासत स्थलों से अनजान हैं। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने और इन मूल्यवान ऐतिहासिक स्थलों को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया।

इस कार्यक्रम में मिशन लाइफ का एक हिस्सा “ट्रैवल फॉर लाइफ” (TFL) पहल पर भी प्रकाश डाला गया, जो स्थायी पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देता है। प्रतिभागियों को जिम्मेदार यात्रा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए ट्रैवल फॉर लाइफ प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया एवं सभी को प्रतिज्ञा दिलाई गई। इस अवसर पर प्रमुख रूप से एनआईटी रायपुर से डॉ. गोवर्धन भट्ट, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड से चंद्र मोहन शर्मा, संदीप साहू, दुर्गा कन्या महाविद्यालय से डॉ. लोकेश्वर प्रसाद सिन्हा, अगोरा ईको टूरिज्म से भाग्येश दुबे, सेजल दुबे आदि उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय की सहायक प्रबंधिका राधिका शर्मा ने प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विरासत स्थलों के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी क्षेत्र की पहचान बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य कला के खजाने की सुरक्षा करना महत्वपूर्ण है। अतीत को गले लगाकर, हम न केवल अपने पूर्वजों का सम्मान करते हैं, बल्कि एक उज्जवल भविष्य को आकार देने के लिए बहुमूल्य अंतर्दृष्टि भी प्राप्त करते हैं।

इस समृद्ध अनुभव की समाप्ति पर, आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों को “अतुल्य भारत” मर्चेंडाइज एवं छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा छत्तीसगढ़ में स्थित खूबसूरत एवं रोमांच से भरे पर्यटन स्थलों की जानकारी से युक्त लिटरेचर वितरित किया, जो उनके इस विरासत वॉक को एक स्थायी याद के रूप में काम करेगा।

इस श्रृंखला की आखिरी वॉक अगले शुक्रवार 26 जुलाई 2024 को प्रातः 0800 बजे रखी है, यह विरासत वॉक सभी इच्छुक प्रतिभागियों के निःशुल्क है, परन्तु सभी को अग्रिम पंजीयन कराना अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिए आप दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं 99680 41077

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