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ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे में बड़ा बदलाव: VB-G राम जी बिल 2025 में 125 दिन काम, राज्यों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

केंद्र की एनडीए सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। संसद में पेश विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-G राम जी बिल, 2025 के तहत अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत यह सीमा 100 दिन है।

हालांकि, इस नए प्रस्ताव से राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ने की संभावना है, क्योंकि पहली बार मजदूरी भुगतान में केंद्र और राज्यों के बीच फंड साझा करने की व्यवस्था की गई है।

रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी

बिल के अनुसार, प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को 125 दिन का अकुशल श्रम रोजगार देने की गारंटी होगी। अभी MGNREGA में कानूनन “कम से कम 100 दिन” का प्रावधान है, जो व्यवहार में अधिकतम सीमा बन गया है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में, जैसे अनुसूचित जनजाति परिवारों या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में, अतिरिक्त दिनों की अनुमति पहले से मौजूद है।

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मजदूरी भुगतान में राज्यों की भागीदारी

VB-G राम जी बिल के तहत मजदूरी भुगतान का बोझ अब पूरी तरह केंद्र सरकार पर नहीं रहेगा। प्रस्तावित फंडिंग पैटर्न के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र-राज्य अनुपात 90:10 रहेगा, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह 60:40 होगा। बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।

यह व्यवस्था MGNREGA से अलग है, जहां अकुशल मजदूरी की पूरी लागत केंद्र सरकार वहन करती है।

‘लेबर बजट’ की जगह ‘नॉर्मेटिव एलोकेशन’

बिल में एक और अहम बदलाव करते हुए लेबर बजट की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। अब केंद्र सरकार हर राज्य के लिए वार्षिक “नॉर्मेटिव एलोकेशन” तय करेगी। यदि कोई राज्य अपनी निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता है, तो अतिरिक्त राशि उसे स्वयं वहन करनी होगी। इससे राज्यों को मिलने वाला खुला वित्तीय समर्थन सीमित हो जाएगा।

कृषि सीजन में काम पर रोक

बिल में पहली बार कृषि के प्रमुख मौसम—बुवाई और कटाई—के दौरान रोजगार कार्यों को अस्थायी रूप से रोकने का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकारें साल में कुल 60 दिनों की अवधि को अधिसूचित करेंगी, जिसमें इस योजना के तहत कोई काम नहीं कराया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे खेती के समय कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, लेकिन इससे रोजगार पाने की समय-सीमा भी सीमित हो जाएगी।

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साप्ताहिक मजदूरी भुगतान का प्रावधान

VB-G राम जी योजना के तहत मजदूरी का भुगतान हर सप्ताह करने की व्यवस्था की गई है। अभी MGNREGA में 15 दिनों के भीतर भुगतान का नियम है। नए बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि देरी की स्थिति में मजदूरों को मुआवजा देने का प्रावधान बरकरार रहेगा। मजदूरी दरें MGNREGA के तहत तय दरों के अनुरूप ही होंगी।

राज्यों के लिए चुनौती

कुल मिलाकर, VB-G राम जी बिल 2025 ग्रामीण रोजगार गारंटी को विस्तार देने का दावा करता है, लेकिन साथ ही इसमें राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ाने, रोजगार अवधि सीमित करने और केंद्र के नियंत्रण को मजबूत करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। इन बदलावों को लेकर आने वाले समय में राजनीतिक और नीतिगत बहस तेज होने की संभावना है।