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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमानी पुरी से जुड़े कथित मानहानिकारक कंटेंट को हटाने के निर्देश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमानी पुरी से जुड़े कथित मानहानिकारक ऑनलाइन कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अज्ञात यूजर्स (जॉन डो) को 24 घंटे के भीतर ऐसे पोस्ट, वीडियो और लिंक हटाने को कहा है।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित यूजर्स निर्धारित समय में सामग्री नहीं हटाते हैं, तो सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को भारत में इस कंटेंट की पहुंच को ब्लॉक करना होगा। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल यह आदेश केवल भारत तक सीमित रहेगा और वैश्विक स्तर पर ब्लॉक करने का निर्देश इस चरण में नहीं दिया गया है।

दरअसल, गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अदालत के समक्ष यह चिंता जताई थी कि क्या भारतीय अदालतें वैश्विक स्तर पर कंटेंट ब्लॉक करने का आदेश दे सकती हैं। इस मुद्दे पर अभी उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में सुनवाई लंबित है। इसी को देखते हुए अदालत ने फिलहाल भारत-सीमित आदेश पारित किया।

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हिमानी पुरी, जो कि अमेरिकी नागरिक हैं, ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि फरवरी 2026 से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ झूठे और निराधार आरोप फैलाए जा रहे हैं। इन आरोपों में उन्हें अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन और उसके कथित नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की गई है, जिसे उन्होंने पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण बताया है।

याचिका में यह भी कहा गया कि इन पोस्ट्स के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, और यह अभियान सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है। उन्होंने अदालत से 10 करोड़ रुपये के हर्जाने, स्थायी निषेधाज्ञा और आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की मांग की है।

सुनवाई के दौरान पुरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी कि यह एक संगठित हमला है और इससे उनकी पेशेवर एवं व्यक्तिगत छवि को गंभीर क्षति पहुंच रही है। वहीं मेटा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने वैश्विक ब्लॉकिंग आदेश का विरोध करते हुए कहा कि इस पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।

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अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि भविष्य में इसी प्रकार का कोई नया मानहानिकारक कंटेंट सामने आता है, तो पुरी संबंधित प्लेटफॉर्म्स को सूचित कर सकती हैं, जिसके बाद उसे भी हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को निर्धारित की गई है।