गुड गवर्नेंस जनता के जीवन में दिखना चाहिए – विष्णु देव साय
रायपुर, 10 जनवरी 2025/ गुड गवर्नेंस केवल फाइलों और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के कार्य व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए। यह बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 समारोह को संबोधित करते हुए कही।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सुशासन और नवाचार के लिए 5 विभागों और 5 जिलों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से अब छत्तीसगढ़ में 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले सभी निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी। निर्माण की स्वीकृति से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस और स्ट्रक्चर लेवल तक की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस का मूल उद्देश्य यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। तकनीकी नवाचारों के जरिए सरकार ने सुशासन को आम नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि ई-प्रगति पोर्टल का उद्देश्य राज्य की बड़ी परियोजनाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इस पोर्टल से योजनाओं की प्रगति का डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध रहेगा और सभी विभागों, जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों, सचिवों और संबंधित अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद, अटल बिहारी वाजपेयी की अंत्योदय की अवधारणा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व से सुशासन की अवधारणा को नई दिशा मिली है। छत्तीसगढ़ में देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग गठित किया गया है, जो सभी योजनाओं के समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र बन चुका है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए गए, अनुपयोगी नियम-कानून समाप्त किए गए और कई में संशोधन हुआ। इन सुधारों से प्रशासन अधिक कुशल बना और नागरिकों का जीवन सरल हुआ। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के माध्यम से नवाचार करने वाले जिलों और विभागों को प्रोत्साहन मिलेगा। आगामी वर्ष से यह पुरस्कार 8 अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदान किए जाएंगे, जिनमें ई-गवर्नेंस, सेवा वितरण, ग्रामीण और शहरी विकास शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “पहल” और “प्रेरणा” योजनाएं प्रारंभ की जा रही हैं। शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी शुरू होगी, जिससे शिकायत निवारण और जनभागीदारी को मजबूती मिलेगी। लोक सेवा गारंटी अधिनियम को LSG-2.0 के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस व्यवस्था से सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता दोनों आई हैं। अब फाइलें हफ्तों नहीं, एक क्लिक पर आगे बढ़ रही हैं। इससे जवाबदेही तय हो रही है और भ्रष्टाचार की संभावना कम हुई है। ई-ऑफिस को शीघ्र ही सभी संभागों और जिलों में लागू किया जाएगा। बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली भी चरणबद्ध तरीके से सभी कार्यालयों में लागू की जा रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खनिज परिवहन की परमिट व्यवस्था को ऑनलाइन करने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है और शासकीय खरीदी को जेम पोर्टल से जोड़ने से पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। रजिस्ट्री विभाग में की गई 10 क्रांतिकारी पहलों से अब नागरिक घर बैठे रजिस्ट्री कर पा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले वर्ष 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर 41 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया, जो जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है। कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन के तहत 2030 तक के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश को समृद्ध और विकसित राज्य बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकास शील ने पुरस्कार प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी टीमों को बधाई दी।
