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छत्तीसगढ़ में मार्च-अप्रैल में बोने योग्य फसलें और फूल

छत्तीसगढ़ की जलवायु उष्णकटिबंधीय है। मार्च-अप्रैल में यहां जायद (Zaid) मौसम शुरू होता है – रबी की कटाई के बाद और खरीफ की बुआई से पहले का छोटा लेकिन लाभदायक अंतराल। इस समय राज्य में तापमान ३०-४२ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है (रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग में औसत ३५-४०°C), आर्द्रता कम होती है, शुष्क हवाएं चलती हैं और वर्षा नगण्य रहती है

इस गर्मी और सूखे में बिना सिंचाई के फसलें जल्दी सूख जाती हैं, लेकिन सिंचित क्षेत्रों (महानदी, नर्मदा बेसिन और नहरों वाले इलाकों) में जायद फसलें ६०-९० दिनों में तैयार हो जाती हैं और बाजार में अच्छा दाम देती हैं। छत्तीसगढ़ कृषि विभाग और बागवानी विभाग के अनुसार, इन फसलों से किसान अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। मिट्टी मुख्यतः लाल-पीली और काली है, pH ६.५-७.५ आदर्श।

नीचे छत्तीसगढ़ के मौसम को ध्यान में रखकर (गर्मी, सूखी हवाएं, सिंचाई पर निर्भरता) विस्तार से फसलें और फूल-पौधे बताए गए हैं। सभी सलाह स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK रायपुर, जगदलपुर, बिलासपुर आदि) और ICAR की मार्च २०२६ सलाह पर आधारित हैं। मिट्टी परीक्षण अवश्य कराएं।

१. मार्च-अप्रैल में बोने योग्य प्रमुख जायद फसलें (छत्तीसगढ़ के गर्म-सूखे मौसम के लिए)

तरबूज (Watermelon) और खरबूजा (Muskmelon) बुआई: मार्च की पहली से दूसरी पखवाड़ी (अप्रैल प्रारंभ तक)। विधि: डायरेक्ट सीडिंग, २-३ मीटर पंक्ति अंतर, २-३ बीज प्रति गड्ढा। छत्तीसगढ़ उपयुक्त किस्में: तरबूज – अर्का मानिक, NS-295, पूसा बेदाना; खरबूजा – पंजाब अनार, हरिद्वार, अर्का राजहंस। देखभाल: गर्मी में हर ५-७ दिन हल्की सिंचाई (ड्रिप उत्तम), ४०-५० क्विंटल गोबर खाद/हेक्टेयर + NPK ८०:४०:४०। फल लगने पर पोटाश बढ़ाएं। कीट नियंत्रण: फल मक्खी के लिए नीम तेल। छत्तीसगढ़ की शुष्क हवाओं में मल्चिंग (पुआल) से नमी बचाएं। पैदावार: २०-३० टन/हेक्टेयर (६०-८० दिन में कटाई)। बाजार में गर्मी में अच्छी मांग। संदर्भ: ICAR-CRIDA मार्च २०२६ बुलेटिन और Captain Tractors Zaid Guide।

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खीरा (Cucumber), लौकी (Bottle Gourd), करेला (Bitter Gourd) और तुरई बुआई: मार्च से अप्रैल (छत्तीसगढ़ में फरवरी अंत से शुरू हो सकती है)। विधि: डायरेक्ट बुआई, १.५-२ मीटर पंक्ति, जाली वाली किस्मों में सपोर्ट लगाएं। उपयुक्त किस्में: खीरा – पंजाब नरकुल, कुकुम्बर HS-१; लौकी – पूसा सुपर, अर्का बहार; करेला – पंजाब-११, कोच-१; तुरई – पूसा चिकनी। देखभाल: छत्तीसगढ़ की तेज गर्मी में रोज हल्की सिंचाई + मल्चिंग। खाद: २५-३० क्विंटल गोबर + ६०:४०:४० NPK। रोग: पाउडरी मिल्ड्यू के लिए सल्फर स्प्रे। पैदावार: खीरा १५-२० टन, लौकी २०-२५ टन/हेक्टेयर।

भिंडी (Okra) और सेम (Cluster Beans) बुआई: मार्च-अप्रैल। विधि: डायरेक्ट, ४५-६० सेमी पंक्ति अंतर। किस्में: भिंडी – परभणी क्रांति, अर्का अनामिका, A-4 (ICAR-CRIDA सलाह); सेम – पूसा सदाबहार। देखभाल: ५-७ दिन सिंचाई, यूरिया टॉप ड्रेसिंग। गर्मी में एफिड्स के लिए इमिडाक्लोप्रिड (ICAR सलाह)। छत्तीसगढ़ के सूखे मौसम में ड्रिप सिंचाई बचतकारी। पैदावार: भिंडी १०-१५ टन/हेक्टेयर (४५-५५ दिन)।

टमाटर, बैंगन (Brinjal) और मिर्च (Chilli) – नर्सरी बुआई बुआई: मार्च में नर्सरी, अप्रैल में ट्रांसप्लांट। विधि: नर्सरी बेड में १०-१५ ग्राम बीज/वर्ग मीटर, ३०-४५ दिन बाद ६०×४५ सेमी अंतर। किस्में: टमाटर – पूसा रूबी, अर्का विकास; बैंगन – पूसा अंजली; मिर्च – पूसा ज्वाला। देखभाल: छाया वाली नर्सरी, पॉलिथीन मल्च। खाद: २० टन गोबर + NPK १२०:६०:६०। बैक्टीरियल विल्ट से बचाव के लिए ड्रिप सिंचाई (ICAR-CRIDA सलाह छत्तीसगढ़ के लिए)। पैदावार: टमाटर २०-३० टन/हेक्टेयर।

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दलहन: मूंग (Moong) और उड़द (Urad) बुआई: मार्च-अप्रैल। विधि: डायरेक्ट, ३०×१० सेमी। किस्में: मूंग – पूसा विशाल, जे-१, K-851; उड़द – पूसा-३, Pant Urd-19 (ICAR सलाह)। देखभाल: कम पानी (हल्की सिंचाई), राइजोबियम कल्चर। छत्तीसगढ़ की शुष्क हवाओं में १५ दिन बाद निराई। पैदावार: ८-१२ क्विंटल/हेक्टेयर।

अन्य: चप्पन कद्दू, अमरांथस (चौलाई), मक्का (फोडर) ये छोटी अवधि की फसलें छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत हैं।

२. मार्च-अप्रैल में बोने योग्य फूल-पौधे (छत्तीसगढ़ की गर्मी में)

इस मौसम में गर्मी-सहनशील वार्षिक फूल उगाएं – घरेलू बागान, बालकनी या व्यावसायिक उत्पादन के लिए।

गेंदा (Marigold) बुआई: मार्च (बीज)। विधि: नर्सरी या डायरेक्ट, ३०×३० सेमी। किस्में: पूसा नारंगी, अर्का अलंक, स्थानीय छत्तीसगढ़ हाइब्रिड। देखभाल: पूर्ण सूर्य, सुबह पानी, नीम तेल (एफिड्स)। छत्तीसगढ़ की सूखी हवा में मल्चिंग। फूल: ४५-६० दिन से निरंतर २-३ महीने।

जीनिया (Zinnia), कोसमॉस (Cosmos) और सूरजमुखी (Sunflower) बुआई: अप्रैल (मार्च अंत में भी)। विधि: डायरेक्ट, ३०-४५ सेमी अंतर। किस्में: जीनिया – पूसा गुलाबी; सूरजमुखी – पूसा-२७७। देखभाल: सुबह पानी, मल्चिंग। कोसमॉस हल्की छाया सहन करता है।

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पोर्टुलाका (Portulaca) और सल्विया (Salvia) बुआई: मार्च-अप्रैल। विधि: बीज या कटिंग। सूखा सहनशील। अन्य: ट्यूबरोज़, अमरिलिस (बल्ब मार्च में), ग्लैडियोलस (अप्रैल में)।

बागान टिप्स (छत्तीसगढ़ मौसम अनुरूप): मिट्टी: १:१:१ (मिट्टी + कोकोपीट + कंपोस्ट)। पानी: सुबह-शाम, ओवरवाटरिंग न करें। खाद: नीम खली + NPK। कीट: नीम तेल। गेंदा-जीनिया व्यावसायिक रूप से अच्छे ।

सामान्य सलाह और सावधानियाँ (छत्तीसगढ़ के गर्म-सूखे मौसम के लिए)

  • मिट्टी परीक्षण: KVK या कृषि विभाग से।
  • सिंचाई: ड्रिप से पानी बचाएं (ICAR सलाह)।
  • कीट-रोग: गर्मी में एफिड्स/मिल्ड्यू – इमिडाक्लोप्रिड या नीम।
  • भंडारण: कटाई के बाद तुरंत बाजार या ठंडा स्थान।
  • लाभ: जायद फसलें २०-३०% अतिरिक्त आय + फूलों से सजावट।

छत्तीसगढ़ में मार्च-अप्रैल की तेज गर्मी और शुष्क हवाएं चुनौती हैं, लेकिन सही सिंचाई और गर्मी-सहनशील किस्मों से जायद फसलें व फूल समृद्धि लाते हैं।बागवानी योजनाओं का लाभ लें। आज ही बीज खरीदकर शुरू करें – एक बूँद पानी और मेहनत से छत्तीसगढ़ की मिट्टी सोना उगाएगी!