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छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता कानून लागू: धर्म परिवर्तन पर सख्त नियम

रायपुर, 7 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता से संबंधित विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह अब पूर्ण रूप से कानून बन गया है। नए कानून के लागू होने के साथ ही प्रदेश में धर्म परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रिया को स्पष्ट, नियंत्रित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए गए हैं।

कानून के अनुसार अब किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से पहले कम से कम 60 दिन पूर्व निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना अनिवार्य होगा। यह आवेदन संबंधित जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति या संस्था को भी पृथक रूप से सूचना देना आवश्यक होगा।

आवेदन प्राप्त होने के बाद प्रशासन द्वारा विस्तृत जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, तहसीलदार तथा ग्राम पंचायत स्तर तक सूचना पहुंचाई जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से किया जा रहा है और इसमें किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या छल शामिल नहीं है।

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कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी संबंधित व्यक्ति को निर्धारित समयावधि में शपथ पत्र सहित सूचना देना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस प्रक्रिया का पालन नहीं करती है या गलत जानकारी प्रस्तुत करती है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नए कानून के तहत जबरन, प्रलोभन या कपटपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने पर कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। सामान्य मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 वर्ष तक का कारावास और लगभग 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं महिलाओं, नाबालिगों तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग से जुड़े मामलों में सजा को बढ़ाकर 10 से 20 वर्ष तक का कारावास किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, संगठित रूप से धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं के विरुद्ध और भी कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं। ऐसे मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

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कानून में विवाह के उद्देश्य से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को भी नियमन के दायरे में लाया गया है। यदि विवाह के लिए धर्म परिवर्तन किया जाता है, तो इसके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा, अन्यथा ऐसे मामलों में कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को बाधित करना नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करना और अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना है। प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने के लिए विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

हालांकि, इस कानून को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ इसे आवश्यक और समयानुकूल कदम मानते हैं, जबकि कुछ ने इसके क्रियान्वयन में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून की सफलता इसके संतुलित और पारदर्शी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी, जिससे सामाजिक समरसता और कानून व्यवस्था दोनों को मजबूत किया जा सके।

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