छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026: अवैध धर्मांतरण पर सख्ती, कड़े दंड और पारदर्शी प्रक्रिया का प्रस्ताव
रायपुर, 10 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध धर्मांतरण को रोकने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि बल, प्रलोभन और कपटपूर्ण तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण साधनों से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा। सरकार का मानना है कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को कानूनी और पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट नियम जरूरी हैं। इसी के तहत यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी।
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, ताकि कोई भी व्यक्ति 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करा सके। सरकार के अनुसार इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और विवादित मामलों को समय रहते रोका जा सकेगा।
मसौदे में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान प्रस्तावित है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित हो, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकती है।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और अधिक कठोर रखी गई है, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के तहत आने वाले अपराधों को संज्ञेय और अजमानतीय रखा गया है तथा मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

