हमारे नायक

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19 नवम्बर1828 रानी लक्ष्मीबाई का जन्म राष्ट्र और संस्कृति रक्षा का अद्भुत संघर्ष

भारत के स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को बनारस में मणिकर्णिका के रूप में हुआ। वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से झाँसी, कालपी और ग्वालियर में अदम्य साहस से युद्ध लड़ा और 18 जून 1858 को रणभूमि में वीरगति प्राप्त की। उनका जीवन त्याग, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक इतिहास है।

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धर्मांतरण के विरुद्ध सांस्कृतिक चेतना की क्रांति करने वाले धरती आबा बिरसा मुंडा

धरती आबा बिरसा मुंडा की जयंती पर जानिए कैसे उन्होंने ब्रिटिश शासन और ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण के खिलाफ सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत की, जिसने आदिवासी अस्मिता को नई दिशा दी।

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समर्पण, सेवा और संस्कार का प्रतीक मालवीयजी का जीवन

महामना पंडित मदनमोहन मालवीय का जीवन राष्ट्र, संस्कृति और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक उनका योगदान भारतीय आत्मा का स्वरूप है।

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आर्य समाज के प्रखर प्रचारक, राष्ट्रवादी विचारक और गदर आंदोलन के क्रांतिकारी भाई परमानंद

आर्य समाज के प्रखर प्रचारक, राष्ट्रवादी विचारक और गदर आंदोलन के क्रांतिकारी भाई परमानंद ने राष्ट्र, संस्कृति और स्वतंत्रता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।

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भारत की एकता और अखंडता के शिल्पकार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल

सरदार वल्लभभाई पटेल भारत की एकता और अखंडता के शिल्पकार थे। उन्होंने 562 रियासतों का भारतीय संघ में विलय कर स्वतंत्र भारत को एक सूत्र में पिरोया। लौहपुरुष पटेल का जीवन राष्ट्र, संस्कृति और समाज के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

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राष्ट्र, संस्कृति और समन्वय के अमर प्रहरी गणेश शंकर विद्यार्थी

गणेश शंकर विद्यार्थी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक पत्रकार, क्रांतिकारियों के सहयोगी और साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रतीक थे। उन्होंने प्रताप पत्र के माध्यम से राष्ट्र चेतना जगाई और समन्वय के संदेश के साथ बलिदान दिया।

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