हमारे नायक

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छत्तीसगढ़ी चेतना के संवाहक: डॉ. खूबचंद बघेल

डॉ. खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक चेतना के पुरोधा थे, जिन्होंने राजनीतिक सिद्धांतों और क्षेत्रीय स्वाभिमान के लिए जीवनभर संघर्ष किया।

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एक ऐसा नाम जो कुश्ती में अपराजेय बना और कहावतों में ढाला गया

दारा सिंह: एक ऐसा नाम जो कुश्ती में अपराजेय बना, फिल्मों में अमर हुआ और रामायण में हनुमान बनकर हर दिल में बस गया—शक्ति, श्रद्धा और प्रेरणा की जीवंत मिसाल।

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1855 का संथाल हूल: जब तीर-कमान ने ब्रिटिश शासन को दी चुनौती

हूल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जनजातीय समाज केवल जंगलों में रहने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि वे स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और बलिदान की महान परंपरा के वाहक हैं।

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रानी दुर्गावती और गोंडवाना साम्राज्य का स्वर्ण युग : पुण्य स्मरण

भारतीय इतिहास में एक ऐसा नाम जिनका शौर्य, पराक्रम, और देशभक्ति विश्व की अन्य महान वीरांगनाओं के समक्ष अद्वितीय है। वे हैं गोंडवाना साम्राज्य की राजमाता वीरांगना रानी दुर्गावती।

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भारतीय स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की प्रतीक : वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

स्वाभिमान, स्वाधीनता और संस्कृति की रक्षा के लिये भारत में असंख्य बलिदान हुए हैं, तब जाकर हमने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता का सूर्योदय देखा। इन बलिदानों में रानी लक्ष्मीबाई का अनूठा बलिदान भी है, जिन्होंने अपनी अंतिम श्वास तक संघर्ष किया।

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