साहित्य

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डॉ. बलदेव होने का अर्थ – जन्म दिवस विशेष

हिंदी और छत्तीसगढ़ी में अब तक डा. बलदेव की 15 कृतियाँ प्रकाशित होकर चर्चित हुई हैं लेकिन डा.बलदेव की बहुत कुछ रचनाएं और पांडुलिपियां अभी भी प्रकाशन की बाट जोह रही हैं ।

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आज का लेखक कहाँ है, जब पाठक गायब होते जा रहे हैं?

कविता -संग्रह, कहानी -संग्रह, उपन्यास आदि साहित्यिक कृतियाँ  बहुत छप रही हैं, लेकिन पढ़ने वालों की संख्या कम होती जा रही है। अन्य देशों का तो नहीं मालूम लेकिन हमारे देश में अपने आस-पास नज़र दौड़ाएँ तो आम तौर पर ऐसा ही माहौल मिलेगा।

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मानव सभ्यता की मार्गदर्शक और ज्ञान का प्राचीन स्रोत पुस्तकें

ग्रंथ मानव सभ्यता की बौद्धिक और सांस्कृतिक यात्रा की अमूल्य धरोहर हैं। जब मनुष्य ने अपनी भावनाओं, विचारों और ज्ञान को संरक्षित करने की आवश्यकता महसूस की, तब श्रुति से स्मृति के रुप में लेखन कला का विकास हुआ।

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भिलाई नगर में हुआ ‘सुरता पारकर ‘ का आयोजन

वरिष्ठ साहित्यकार और समाजसेवी स्वर्गीय रामप्यारा पारकर की स्मृति में ‘सुरता पारकर’ कार्यक्रम का आयोजन 19 अप्रैल को निर्मल ज्ञान मंदिर, कबीर आश्रम, नेहरू नगर भिलाई में किया गया। इस आयोजन का यह नवम वर्ष था। कार्यक्रम का आयोजन लोक कला एवं साहित्य संस्था ‘सिरजन’ द्वारा किया गया।

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बूँद-बूँद सागर : लाला जगदलपुरी की काव्य साधना का प्रतिबिंब

पुस्तक में आठ पृष्ठों में संपादक विनय श्रीवास्तव ने लाला जी की साहित्यिक यात्रा, उपलब्धियों और प्रकाशित कृतियों का गहन परिचय दिया है। वे केवल कवि नहीं, बल्कि एक सशक्त गद्य-शिल्पी, इतिहासकार और लोकसंस्कृति के सजग अध्येता भी थे।

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futuredपुस्तक समीक्षासाहित्य

लोकभाषा से लोकमन तक लाला जगदलपुरी की बाल रचनाओं की जीवंतता

र्तमान पीढ़ी के बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि अपनी 93 साल की जीवन यात्रा के लगभग सात दशक साहित्य साधना में लगा देने वाले साहित्य महर्षि लाला जगदलपुरी ने बड़ों के लिखने के साथ -साथ बच्चों के लिए भी ख़ूब लिखा।

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