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वृक्षों की रक्षा करने वाले बलिदानियों की स्मृति में लगता है खेजड़ली में मेला

पेड़ों पर चलती कुल्हाड़ी के बीच लोगों ने अपने आपको सामने कर दिया। पेड़ कटे तो नहीं.. पर पेड़ों को बचाते 363 ग्रामीणों ने अपना जीवन पेड़ों के लिए समर्पित कर दिया। ऐसी दर्दनाक घटना 600 साल पहले राजस्थान के खेजड़ली गांव में घटी। पेड़ों की रक्षा करने के लिए ऐसा अनूठा बलिदान संत गुरु जभ्भोंजी के अनुयायी बिश्नोईयों ने किया था।

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हिन्दी से लोक भाषाओं तथा बोलियों का अंतरसंबंध : हिन्दी दिवस विशेष

हिन्दी, भारत की राजभाषा होने के साथ-साथ व्यापक रूप से उपयोग में आने वाली भाषा है। इसके साथ ही, विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएँ और बोलियाँ भी अस्तित्व में हैं जो भारत के सांस्कृतिक ताने-बाने को समृद्ध करती हैं। हिन्दी और इन लोक भाषाओं और बोलियों का आपसी संबंध अत्यंत गहरा और पुराना है।

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स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण का ऐतिहासिक प्रभाव

वाराणसी की अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने कहा, ‘मैं जा रहा हूं, लेकिन मैं तब तक वापस नहीं आऊंगा जब तक कि मैं समाज पर बम की तरह फट न सकूं।’  इस अवधि में, स्वामीजी ने एक बार कहा था, ‘मेरे जीवन के अंतिम बारह वर्षों में, मुझे यह नहीं पता था कि अगला भोजन कहाँ से आएगा।’ उन्होंने इस अवधि के दौरान शिकागो में विश्व धर्म संसद के बारे में भी जाना।

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भारतीय शिक्षा प्रणाली के शिल्पकार डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : शिक्षक दिवस विशेष

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान अद्वितीय और अतुलनीय है। उन्होंने शिक्षा को केवल जानकारी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका माना। उनके विचारों और प्रयासों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को नई दिशा और दृष्टिकोण दिया। वे आज भी एक आदर्श शिक्षक और शिक्षाविद् के रूप में याद किए जाते हैं, जिनका जीवन और कार्य हमें शिक्षा के महत्व को समझने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है।

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तोता मैना जैसे पक्षी पालने से हो सकती है जेल : वन विभाग का सख्त निर्देश

छत्तीसगढ़ राज्य में तोते और अन्य संरक्षित पक्षियों की अवैध बिक्री के खिलाफ कठोर कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य में इन पक्षियों की अवैध खरीदी-बिक्री के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए, वन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्यवाही करने का निर्देश दिया है

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हिन्दी साहित्य में व्यंग्य विधा के संस्थापक हरिशंकर परसाई

उनकी लोकप्रिय व्यंग्य रचनाओं में ‘सदाचार का ताबीज’,और ‘इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा ‘रानी नागफनी की कहानी’ उनका बहुचर्चित व्यंग्य उपन्यास है। वह हमेशा साम्प्रदायिकता के ख़िलाफ़ रहे। धार्मिक और जातीय संकीर्णताओं का उन्होंने अपनी व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से हमेशा विरोध किया। वह अपनी कलम से साम्प्रदायिक शक्तियों का पर्दाफ़ाश भी करते रहे।

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