मेरा गाँव मेरा बचपन

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लोकसंस्कृति में प्रवाहित होता महुआ का मधुर स्मृति प्रवाह

फागुन चैत्र की महुआ महक से शुरू होकर वैदिक मधुका मंत्र अथर्ववेद ऋग्वेद आयुर्वेद चरक सुश्रुत तक और लोक संस्कृति आधुनिक साहित्य रेणु पर्यावरण विमर्श तक महुआ का सतत प्रवाह जो लोक स्मृति प्रकृति और जीवन चक्र का प्रतीक है।

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मेरे आंगन की गौरैया अब दिखती नहीं

मेरे आंगन की गौरैया अब दिखती नहीं—इस भावनात्मक और तथ्यात्मक हिंदी आलेख में गौरैया के घटते अस्तित्व, पर्यावरणीय कारणों और संरक्षण के उपायों का मार्मिक वर्णन।

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छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और कृषि आधारित पहचान पोला और गरभ पूजा

छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं हरेली, गरभ पूजा और पोला तिहार। जानें इन कृषि आधारित त्यौहारों की परंपराओं, मान्यताओं और सामाजिक महत्व के बारे में।

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क्या सच में आती है दूसरे लोक से उड़न तश्तरी?

उड़न तश्तरी (UFO) केवल विज्ञान का रहस्य नहीं, बल्कि लोककथाओं, दादी की कहानियों और पौराणिक ग्रंथों में भी रची-बसी है। इस लेख में पढ़ें कैसे यह रहस्य कल्पना, संस्कृति और वैज्ञानिक खोजों के संगम से आकार लेता है।

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“स्कूटी दीदी” एनु बनी आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की एनु, जिन्हें “स्कूटी दीदी” के नाम से जाना जाता है, ग्रामीण महिलाओं को दोपहिया प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनके कार्यों की प्रशंसा की।

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भारत का सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव बैसाखी

बैसाखी की जड़ें प्राचीन भारत में गहरी हैं, जब यह मुख्य रूप से पंजाब और उत्तरी भारत के किसानों द्वारा एक फसल त्योहार के रूप में मनाया जाता था। यह वह समय था जब सर्दियों की फसलें, विशेष रूप से गेहूँ, तैयार होकर खेतों में सुनहरी चमक बिखेरती थीं।

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