धर्म-अध्यात्म

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भक्ति आंदोलनऔर सामाजिक समरसता के प्रकाशपुंज गुरु नानक देव जी

गुरु नानक देव जी ने भक्ति आंदोलन को आध्यात्मिकता से आगे बढ़ाकर सामाजिक समरसता, नारी सम्मान और भाईचारे का प्रतीक बनाया। उनकी साखियों में मानवता और एकेश्वरवाद का जीवंत संदेश छिपा है, जो आज भी प्रासंगिक है।

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हरि-हर मिलन का दिव्य पर्व वैकुंठ चतुर्दशी

वैकुंठ चतुर्दशी हरि-हर मिलन का पावन पर्व है, जो विष्णु-शिव एकता, मोक्ष, भक्ति और संतुलन के संदेश के साथ आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाता है।

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भाई दूज की अनकही कहानी : यम-यमुना से आज तक

भाई दूज का पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और परिवार में प्रेम का उजाला फैलता है।

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राम की विजय से प्रेरित एक अमर यात्रा : तमसो मा ज्योतिर्गमय

दीपावली केवल उत्सव नहीं, बल्कि रामचरितमानस के उत्तरकांड में वर्णित अयोध्या आगमन की वह आत्मिक यात्रा है, जहाँ धर्म, करुणा और सत्य का आलोक समूचे मानव जीवन को प्रकाशित करता है।

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आत्मा का आलोक और आत्मदीपो भवः का संदेश दीपावली

दीपावली केवल प्रकाश का नहीं, आत्मा के जागरण और आत्मज्ञान का पर्व है। यह सनातन परंपरा में आत्मदीपो भवः — अपना दीप स्वयं बनने का संदेश देता है। जानिए दीपोत्सव के आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम।

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नरकासुर वध और छोटी दीपावली: असुरता पर दिव्यता की विजय का पर्व

भारतीय संस्कृति में छोटी दीपावली या नरक चतुर्दशी केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि आंतरिक प्रकाश और आत्मशुद्धि का संदेश है। जानिए कैसे श्रीकृष्ण और सत्यभामा द्वारा नरकासुर वध की कथा मानव जीवन में अंधकार से प्रकाश की यात्रा का प्रतीक बनती है।

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