धर्म-अध्यात्म

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आस्था, प्रकृति और जैवविविधता संरक्षण का पर्व : वट सावित्री व्रत

जैवविविधता के पोषण की दृष्टि से भी वट वृक्ष अत्यंत उपयोगी है। इसकी शाखाओं में कई प्रकार के पक्षी घोंसले बनाते हैं और इसके फल, पत्तियाँ तथा गोंद अनेक कीट-पतंगों और मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं।

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कठोपनिषद में यम और नचिकेता का संवाद

कठोपनिषद भारतीय दर्शन की एक अत्यंत गूढ़ और प्रेरणादायक रचना है, जिसमें यमराज और बालक नचिकेता के बीच हुआ संवाद आत्मा, मृत्यु, मोक्ष और ब्रह्मविद्या जैसे गंभीर विषयों पर प्रकाश डालता है।

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देवर्षि नारद जयंती: संवाद, संस्कृति और सनातन मूल्यों की प्रेरणा

ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया को देवर्षि नारद की जयंती के रूप में मनाया जाता है। संवाद, संस्कृति और सत्य के प्रचार में उनके योगदान को आधुनिक पत्रकारिता का आदर्श माना जाता है। वे केवल देवताओं के प्रवक्ता नहीं, बल्कि समाज सुधार, नीति मार्गदर्शन और धर्म की स्थापना के प्रेरक भी थे। उनका जीवन आज के संवाद माध्यमों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।

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सनातन हिंदू धर्म एवं भारत में उत्पन्न समस्त मत पंथ विश्व में शांति चाहते हैं

भारत में सनातन हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध, जैन, सिख जैसे अनेक मत पंथों का विकास हुआ है, जो सभी किसी न किसी रूप में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े हैं। इनकी तुलना में सेमेटिक धर्म जैसे यहूदी, ईसाई और इस्लाम एकेश्वरवाद और कर्मकांड पर आधारित हैं। भारत की धार्मिक विविधता और सहिष्णुता ही उसे विश्व में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।

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रामकृष्ण मिशन: सेवा, शिक्षा और अध्यात्म का विश्वव्यापी संगम

रामकृष्ण मिशन, जिसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1897 में की थी, एक धार्मिक, सामाजिक और गैर-राजनीतिक संगठन है जो विश्वभर में सेवा, शिक्षा और अध्यात्म के क्षेत्रों में कार्यरत है। यह मिशन मानवता की सेवा को ईश्वर-सेवा मानते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आपदा राहत और आध्यात्मिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। मिशन का उद्देश्य “मानव में ईश्वर की सेवा” और सभी धर्मों में सामंजस्य स्थापित करना है।

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कूटरचित है परशुराम जी के क्रोधी होने और क्षत्रिय संघर्ष की बातें

भगवान् परशुरामजी नारायण का अवतार हैं, ऋषि हैं, गुरू हैं । उनका गुस्सा रोष है, क्रोध नहीं । उनके बारे में संस्कृत में रोष शब्द ही आया है जिसका हिन्दी अनुवाद क्रोध के रूप में करके भ्रान्तियाँ फैलाईं गई।

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