धर्म-अध्यात्म

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सृष्टि चक्र का शाश्वत सनातन संवाहक भारतीय नवसम्वत्सर

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर आधारित हिन्दू नववर्ष (नवसंवत्सर) का सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व, भारतीय कालगणना, नवरात्रि, रामराज्य और विविध भारतीय परंपराओं का विस्तृत विवेचन।

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पौराणिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है नवरात्र

नवरात्र का पौराणिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व—महिषासुर वध से लेकर नवऊर्जा, उपवास और भारतीय कालचक्र तक का विस्तृत विश्लेषण।

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नवसंवत्सर: प्रकृति के नव श्रृंगार का उत्सव

भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला सृष्टि, ऋतु-चक्र, खगोलीय विज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा पावन पर्व है, जो भारतीय जीवन-दर्शन और प्रकृति-सामंजस्य का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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पाश्चात्य बनाम सनातन दृष्टि: अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नई विश्व व्यवस्था पर उठता विमर्श

वैश्विक राजनीति में बढ़ते संघर्ष और अस्थिरता के बीच अंतरराष्ट्रीय संबंधों के पारंपरिक पश्चिमी सिद्धांतों पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय दार्शनिक परंपरा और कौटिल्य जैसे प्राचीन विचारकों के सिद्धांत आधुनिक विश्व व्यवस्था को समझने और संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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आमलकी व्रत और रंगभरी उत्सव का सांस्कृतिक महत्व

इसी मधुर ऋतु परिवर्तन के बीच एक तिथि आती है जो संयम और उत्सव दोनों को साथ लेकर चलती है। यह है फाल्गुन शुक्ल एकादशी। यही दिन आमलकी एकादशी के रूप में भी जाना जाता है और काशी की परंपरा में रंगभरी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है।

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दया, प्रेम और समन्वय के प्रतीक संत दादू दयाल

भारतीय संत परंपरा में कुछ ऐसे नाम हैं जिनकी उपस्थिति केवल इतिहास की पंक्तियों में सीमित नहीं रहती, बल्कि लोकमानस की धड़कनों में बस जाती है। संत दादू दयाल उन्हीं दिव्य व्यक्तित्वों में से एक हैं।

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