इतिहास

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इतिहास के सबसे विचित्र और निरर्थक युद्ध, जब तुच्छ विवादों ने इतिहास में खून बहाया

‘मतीरे की राड़’ और ‘बाल्टी के युद्ध’ जैसे ऐतिहासिक उदाहरण बताते हैं कि तुच्छ कारणों और अहंकार से भड़की जिद ने कैसे हजारों जिंदगियाँ लीं। यह आलेख इन घटनाओं से मिलने वाले शांति और संवाद के संदेश को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

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राष्ट्र की आत्मा का अमर गीत वन्दे मातरम्

वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला यह राष्ट्रगीत स्वाधीनता संग्राम के दौरान जन-जन की आवाज बना। शताब्दी वर्ष पर यह गीत आज भी भारत के सांस्कृतिक गौरव, एकता और मातृभूमि-भक्ति का प्रतीक है।

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जनजातीय संस्कृति और स्वत्व के प्रहरी कार्तिक उरांव

कार्तिक उरांव एक विलक्षण आदिवासी नेता, विचारक और समाज सुधारक थे जिन्होंने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण, धर्मांतरण के विरोध और आरक्षण की नीति पर ठोस विचार रखे। उनका जीवन सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रगौरव की प्रेरक गाथा है।

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रामजी के आदर्शों पर आधारित संगठन का अद्वितीय अध्याय : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा रामजी के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन मूल्यों से प्रेरित संगठन की सौ वर्षीय ध्येयनिष्ठ और संघर्षशील यात्रा का प्रतीक है।

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अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस : संवाद और सभ्यता का सेतु

अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस 30 सितंबर को मनाया जाता है, जो अनुवादकों और भाषाई विशेषज्ञों को सम्मानित करता है। यह दिवस भाषाओं की दीवारें तोड़कर सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शांति और मानव सभ्यता को जोड़ने का प्रतीक है।

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futuredइतिहासहमारे नायक

सिवाणा का पहला जौहर और साका : वीरता और बलिदान की अमर गाथा

सिवाणा दुर्ग के पहले जौहर और साके की रोमांचक गाथा, जिसमें सातलदेव सोनगरा और वीरांगनाओं ने स्वाभिमान व सम्मान की रक्षा हेतु अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया।

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