लोक-संस्कृति

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बुंदेलखंडी वाचिक परम्परा में जीवन के विविध रंग

‘लोकगीत’ धरती, पर्वत, फसलों, नदियों का राग है, प्रकृति की उन्मुक्त आवाज़ है जो उत्सवों, मेलों और त्योहारों में लोक समूहों के मधुर कंठों से गुंजारित होकर कानो में रस घोलती है। साहित्य की छंदबद्धता एवं अलंकारों से मुक्त रहकर ये मानवीय संवेदनाओं के संवाहक के रूप में माधुर्य प्रवाहित कर हमें तन्मयता के लोक में पहुँचा देते हैं।

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विध्वंस और पुनर्निर्माण का इतिहास : जगन्नाथ पुरी

उड़ीसा प्राँत के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा और रथोत्सव 7 जुलाई से आरंभ हो रहा है। जो 16

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प्रथम किसानी तिहार अक्ति पूजा के बाद खेती बाड़ी का काम शुरू

माना जाता है कि गांव में हर काम से पहले साहड़ा देव की पूजा की जाती है। आवाहन पूजन के दौरान गांव के युवा खेतों में नागर का प्रतिरुप चलाते हुए, सामूहिक रूप से सहाड़ा देवता की पूजा कर अच्छे फसल की कामना की।

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