रमतूला की गूंज में बसती है बुंदेलखंड की सांस्कृतिक आत्मा
रमतूला बुंदेलखंड का पारंपरिक लोक वाद्य है, जो शौर्य, आस्था, विवाह परंपराओं और लोक संस्कृति की पहचान माना जाता है। जानिए इसके इतिहास, संरचना और सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत कहानी।
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Read Moreयह लेख भोजशाला–कमाल मौला परिसर से जुड़े पुरातात्विक, स्थापत्य और ऐतिहासिक साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए इसे राजा भोज कालीन सरस्वती मंदिर एवं विद्या-पीठ के रूप में प्रस्तुत करता है। “विजय का पर्व” इतिहास, प्रमाण और सांस्कृतिक स्मृति की पुनर्पुष्टि का भावपूर्ण आलेख है।
Read Moreदेवर्षि नारद को भारतीय परंपरा में केवल एक ऋषि नहीं, बल्कि लोक संचार और संवाद के प्रथम आचार्य के रूप में भी देखा जाता है। देवर्षि नारद के जीवन, कार्य और संस्कृत ग्रंथों में वर्णित उनके संवादों के आधार पर यह शोधपरक आलेख इस प्रश्न का विश्लेषण करता है
Read Moreदेवर्षि नारद को केवल पौराणिक पात्र ही नहीं, बल्कि लोककल्याण के संवाहक और आदर्श पत्रकार के रूप में समझना आवश्यक है। निष्पक्षता, सत्य और संवाद की उनकी परंपरा आज भी पत्रकारिता के लिए मार्गदर्शक है।
Read Moreअजमेर के नया बाजार होलीदड़ा स्थित श्रीनृसिंह मंदिर में नृसिंह जयंती पर लगने वाला ऐतिहासिक लाल्या-काल्या मेला, जहां वराह और नृसिंह अवतार की कथा जीवंत रूप में प्रस्तुत की जाती है।
Read Moreसूरदास के पदों में प्रकृति और पर्यावरण चेतना का गहन विश्लेषण। सूरसागर के चुनिंदा पदों की व्याख्या सहित ब्रज की यमुना, वृंदावन वनों, ऋतुओं और गोचारण संस्कृति पर आधारित प्रेरणादायक आलेख जो भक्ति और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ता है।
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