धर्म-अध्यात्म

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आस्था, संस्कृति और आर्थिक विकास का संगम महाकुंभ 2025

हिंदू सनातन संस्कृति के अनुसार कुंभ मेला एक धार्मिक महाआयोजन है जो 12 वर्षों के दौरान चार बार मनाया जाता है। कुंभ मेले का भौगोलिक स्थान भारत में चार स्थानों पर फैला हुआ है और मेला स्थल चार पवित्र नदियों पर स्थित चार तीर्थस्थलों में से एक के बीच घूमता रहता है

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तिल चौथ का महत्व, इतिहास, पौराणिक कथा और विधि

तिल चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल आध्यात्मिक रूप से प्रेरित करता है, बल्कि जीवन में अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा लाने का माध्यम भी है। भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन के संकटों को दूर करने के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है। 

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देवगणों के जागने का पर्व मकर संक्रांति एवं गंगा सागर तीर्थ

राजा भगीरथ ने अपने पितरों का गंगाजल, अक्षत और तिल से श्राद्ध-तर्पण किया था जिससे उनके पितरों को प्रेतयोनि से मुक्ति मिली थी। तब से मकर संक्रांति स्नान, मकर संक्रांति श्राद्ध-तर्पण और दान आदि की परंपरा प्रचलित है।

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राम कृपा बिनु सुलभ न सोई

राम मंदिर के उद्घाटन के साथ, अयोध्या एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह न केवल भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के केंद्र के रूप में भी पहचाना जाएगा। यह मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था, संघर्ष और प्रतीक्षा का सजीव उदाहरण है।

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सोमवती अमावस्या का महत्व और परंपरा

सोमवती अमावस्या की कथाएँ इस बात को रेखांकित करती हैं कि यह दिन श्रद्धा, सेवा, दान और पितृ पूजा के माध्यम से जीवन में शुभता और समृद्धि लाने का अवसर प्रदान करता है।

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पृथ्वी पर सनातन संस्कृति का महाकुंभ प्रयागराज में

कुंभ मेला सनातन परंपरा की सर्वोच्च तीर्थ यात्रा करते लोग नदियों में स्नान कर ज्ञान की पिपासा लिए संत समागम करते हैं। मोक्ष की आस लिए सर्वस्व दान करते हैं, जहां चहुंओर मंत्रोच्चार अनहद नाद ध्वनित होते हुए महसूस होता है। ऐसे सुंदरतम दृश्य को निहारने अपार जनसमूह आ जुटता है कुंभ के मेला में…!

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