धर्म-अध्यात्म

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एकादशी व्रत एवं पापमोचनी एकादशी का महत्व

पापमोचनी एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी प्रदान करती है। यह व्रत पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का साधन है। विधि-विधान से इस व्रत को करने से व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है और मोक्ष के पथ पर अग्रसर हो सकता है।

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माता शीतला की उपासना और पौराणिक मान्यताएँ

शीतला सप्तमी एक महत्वपूर्ण भारतीय पर्व है जो माता शीतला को समर्पित होता है। यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत राजस्थान गुजरात और मध्य प्रदेश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा कर रोगों से मुक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

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छत्तीसगढ़ में रंग पंचमी के दिन लट्ठमार होली

छत्तीसगढ़ में रंग पंचमी का त्योहार पारंपरिक उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार होली के पांच दिन बाद आता है और इसमें रंगों की धूम देखने को मिलती है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इसे एक सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाता है, तथा इस दिन भी फ़ाग गाने एवं रंग खेलने की परम्परा दिखाई देती है।

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होलिका दहन का वैदिक, पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व

 वैदिक काल में इस पर्व को नवासस्येष्टि यज्ञ कहा गया। उस समय अधपके अन्न को यज्ञ में दान कर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता था। इस अन्न को होला कहते थे। अतः इसका नाम होलिकोत्सव पड़ा।

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खेलत अवधपुरी में फाग, रघुवर जनक लली

होली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम उनकी त्योहारों और पर्वो में दिखाई देता है। इन पर्वो में न जात होती है न पात, राजा और रंक सभी एक होकर इन त्योहारों को मनाते हैं। सारी कटुता को भूलकर अनुराग भरे माधुर्य से इसे मनाते हैं। इसीलिए होली को एकता, समन्वय और सदभावना का राष्ट्रीय पर्व कहा जाता है।

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सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव का प्रतीक तीर्थयात्राएं

इस महाकुंभ में पचास करोड़ से अधिक लोगों ने डुबकी लगा चुके हैं। सबने एक दूसरे का कंधा पकड़कर, एक दूसरे का सहयोग करके डुबकी लगाई। किसी ने किसी से जाति नहीं पूछी, अमीरी और गरीबी का भेद नहीं था, अधिकारी और सामान्य का भी भेद न था। सबकी एक ही पहचान “सनातनी हिन्दू”।

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