धर्म-अध्यात्म

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ननिहाल छत्तीसगढ़ में राम तत्व

भारत के मानचित्र में हृदय स्थल पर छत्तीसगढ़ प्रदेश स्थित है। लोक मान्यता है कि यहाँ भगवान राम ने वनवास काल के चौदह वर्षों में से दस वर्ष बिताए। यह एक ऐसा स्थान है कि जहाँ का वातावरण आपको राममय दिखाई देता है। सारा अंचल राम नाम से ओतप्रोत है। भगवान राम भी यहाँ आए और यहीं के होकर रह गए। ऐसे रचे बसे कि यहाँ की संस्कृति के रोम-रोम में समा गए। कण कण में राम तत्व समाहित हो गया। 

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लोक देवियाँ और छत्तीसगढ़ की शाक्त परम्परा

छत्तीसगढ़ में शक्ति की उपासना प्रमुख रुप से की जाती है क्योंकि यहाँ का जनमानस इस बात को जानता है कि शक्ति के बिना सृष्टि की उत्पत्ति और विकास तथा सृष्टि के विनाश तक की कल्पना नहीं की जा सकती है। शाक्त परम्परा से संबंधित प्रमाण हमें यहां की मृण्यमयी मूर्तिकला, शिल्प, साहित्य, संस्कृति और जीवन शैली में सहज ही देखे जा सकते हैं।

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सूर्योपासना और छठी मैया की आराधना का पावन पर्व : चैती छठ

चैती छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और प्रकृति के प्रति सम्मान का पर्व है। इसकी पौराणिक कथाएँ बताती हैं कि यह व्रत सूर्य देव और छठी मैया की कृपा पाने का एक माध्यम है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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भारतीय नव वर्ष का धार्मिक सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व

भारत में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का प्रारंभ माना जाता है। चैत्र मास सामान्यतः मार्च-अप्रैल के महीने में आता है, और इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है

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माँ दुर्गा के नौ स्वरूप और उनका आध्यात्मिक महत्व

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिन्दू नववर्ष या नव संवत्सर का आरंभ होता है ।जिसे भारत के विभिन्न राज्यों में जैसे महाराष्ट्र में गुड़ीपड़वा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, और कर्नाटक में उगादि, जम्मू कश्मीर में नवरेह तथा मणिपुर में साजिबु नोंगमा पंबा के नाम से जाना जाता है।

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विश्व शांति एवं समृद्धि के लिए हिंदुओं को एक करने का प्रयास करता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

वैश्विक अशांति के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत में समरस और संगठित हिंदू समाज निर्माण का प्रस्ताव पास किया है। इस प्रस्ताव में भारत की प्राचीन संस्कृति के महत्व और राष्ट्र के विकास के लिए सनातन संस्कारों के पालन पर जोर दिया गया है। संघ के प्रयासों से सामाजिक समरसता, पर्यावरणीय जागरूकता और नागरिक कर्तव्यों की भावना बढ़ रही है।

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